कर्मचारी संगठनों की केंद्रीय कमेटियों द्वारा शुक्रवार को आहूत हड़ताल का बहादुरगढ़ के सरकारी दफ्तरों में व्यापक असर रहा। कई दफ्तरों के सभी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। एकाध ऑफिस में हड़ताल का मिला-जुला असर दिखाई दिया। हड़ताली कर्मचारियों ने देवीलाल पार्क में सभा की और शहर में जुलूस निकाला।
ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 12 सूत्रीय मांगों को लेकर की गई हड़ताल ने शुक्रवार को जहां प्रशासन के हाथ पांव फूला दिए। वहीं आमजन को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल में बिजली निगम, मजदूर कल्याण मंच, खेत मजदूर फेडरेशन, राज्य परिवहन निगम, आंगनबाड़ी वर्कर, सफाई कर्मचारियों के अलावा विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।
रोडवेज की काफी बसें बंद रही। प्रधान कर्मवीर छिल्लर ने हड़ताली कर्मचारियों से कहा कि भाजपा सरकार श्रम कानूनों में बदलाव करके सिर्फ पूंजीपतियों को फायदा पहुंचा रही है। चुनावी घोषणा पत्र के अपने वादों से मुकर कर निजीकरण व ठेकेदारी प्रथा को महत्व दे रही है। इस मौके पर बालकिशन छिल्लर, जयपाल राठी, बलजीत, सुरेंद्र, कुलदीप, राकेश, राजेश समेत अनेक रोडवेज कर्मी मौजूद रहे।
जन स्वास्थ्य विभाग, पर्यटन विभाग, बीएसएनएल, एलआईसी, सिंचाई, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील व आशा वर्कर भी हड़ताल पर रही। देवीलाल पार्क में हुई सभा में हड़तालियों को एसयूसीआई के जयकरण, सतीश कुमार, लालजी, हरियाणा पर्यटन के कुलदीप सांगवान व रणबीर सिंह, सीआईटीयू के मुकेश मोरखी, नगर पालिका कर्मचारी यूनियन प्रधान राजेंद्र व धर्मपाल, बिजेंद्र सैनी, राजेंद्र जांगड़ा, ग्रामीण चौकीदार यूनियन के राम कुमार, मिड-डे मील की सूरजमुखी ने भी संबोधित किया।
बिजली निगम के कर्मचारिजयों ने भी सरकार के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए जमकर नारेबाजी की। कर्मचारी नेता बंसीलाल ने कहा कि कमीशन खोरी के चक्कर में यह सब कुछ हो रहा है। इसके अलावा सफाई कर्मियों ने भी जम कर सरकार को कोसा। सभी कर्मचारियों की मांग है कि बढ़ती महंगाई पर रोक लगाते हुए ठेकेदारी प्रथा को खत्म कर सभी रोजगार की व्यवस्था करें। पंजाब की तर्ज पर वेतन दिया जाना चाहिए। न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये होना चाहिए। जबकि मनरेगा की मजदूरी 500 रुपये तय की जाए। अस्थाई भर्ती नीति खत्म होनी चाहिए। निजीकरण पर रोक लगनी चाहिए।
बैंक, बीमा, रेलवे, प्रतिरक्षा आदि में एफडीआई की मंजूरी सरकार को वापिस लेनी चाहिए। पुरानी पेंशन नीति लागू होनी चाहिए। सभी मजदूरों का पंजीकरण होना चाहिए। आशा, मिड-डे मिल व आंगनबाड़ी वर्करों ने मांग की है कि उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिलना चाहिए। हड़ताल को लेकर प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद नजर आया। हड़ताल कर्मचारियों के बीच सादे कपड़ों में पुलिस बल को भी तैनात किया गया। इसके अलावा फायर बिग्रेड व अन्य सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। ड्यूटी मैजिस्ट्रेट मातूराम के नेतृत्व में अन्य अधिकारियों ने सभी कार्यालयों पर नजर रखी। हड़ताल के कारण आमजन को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। अपने कार्य के लिए सरकारी दफ्तरों में आए लोगों को वापसी का रुख करना पड़ा।