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Jhajjar-Bahadurgarh News: विद्यालयों का निजी प्रकाशकों से कमीशन तय, वेंडर भी खुद चुनते

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-फोटो 64 : शहर में बुक डिपो पर खरीदारी करते लोग। संवाद
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बहादुरगढ़। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों की चिंता हर साल मार्च-अपै्रल के महीने में बढ़ जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। कहीं स्कूलों ने फीस बढ़ा दी है तो कहीं कॉपी-किताबों की दुकानें फिक्स हैं। ऐसे में स्कूल संचालकों द्वारा बताई गई दुकानों से कॉपी-किताबें ड्रेस खरीदने से आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। वहीं स्कूलों में एनसीईआरटी की बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें लगाई गई हैं। दरअसल, इन निजी प्रकाशकों से स्कूलों का कमीशन तय होता है। खास बात यह है कि वेंडर भी यह खुद ही चुनते हैं। ऐसे में अभिभावकों की जेबें ढीली हो रही हैं। जहां एनसीईआरटी का हाईस्कूल का बुकसेट दो से ढाई हजार में आसानी से मिल जाता है। वहीं निजी प्रकाशकों का यह सेट 5 से 6 हजार रुपये में आता है। अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन और शिक्षा विभाग इस तरफ कोई कार्रवाई नहीं करता।
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नए सत्र में कॉपी-किताबों के दाम बढ़ने और स्टेशनरी की कीमतों में इजाफा होने की वजह से अभिभावकों का बजट गड़बड़ाने लगा है। अभिभावकों का तर्क है कि महंगाई में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। 1 अपै्रल से स्कूलों में नया सत्र शुरू हो चुका है। अधिकतर स्कूलों ने अभिभावकों को परीक्षा परिणाम के साथ बुक की रेट लिस्ट भी थमा दी। स्कूलों की ओर से वेंडर के नाम भी बताए गए हैं। वहां से कॉपी किताब लेने पर 20 से 25 प्रतिशत अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। ए फोर साइज के कागज में पिछले छह महीने में करीब 25 फीसदी तक तेजी आई है। काठमंडी निवासी नीरज शर्मा, लाइनपार के शंकर गार्डन निवासी मनोज कुमार, नई बस्ती निवासी हरीश कुमार ने कहा कि इतनी महंगाई में बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाना महंगा होता जा रहा है। हरीश कुमार ने बताया कि उनका बेटा एक निजी स्कूल में नौंवीं कक्षा में पढ़ता है। स्कूल संचालक की ओर से फीस बढ़ाने का ऐलान किया गया है। वहीं कॉपी-किताबें खरीदने पर दुकान भी बताई गई है। वहां से किताबें महंगी मिल रही हैं। वहीं स्टेशनरी के दाम भी दुकानदारों की ओर से बढ़ाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कॉपी किताबों के बाद स्टेशनरी के सामान जैसे पेेंसिल, रबड़, कलर, स्कूल बैग, स्कैच पैन, पेंसिल बॉक्स तक में पांच से 10 फीसदी की वृद्धि हुई है। स्कैच पैन, कलर बॉक्स जो पिदले साल 60 से 80 रुपये में मिला करते थे, अब उनकी कीमत 80 से 110 रुपये हो गई है। जो स्कूल बैग 800 रुपये का था। अब उसी के लिए 1300 से 1500 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। अभिभावकों ने कहा कि एनसीईआरटी की भी सभी किताबें नहीं चल रही हैं। यदि वह चलें तो थोड़ा बोझ कम हो। हर साल बच्चों की पढ़ाई महंगी होती जा रही है। एक तरफ फीस बढ़ रही है तो दूसरी तरफ कॉपी-किताबों के साथ स्टेशनरी के दाम।
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-फोटो 64 : शहर में बुक डिपो पर खरीदारी करते लोग। संवाद





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