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Jhajjar-Bahadurgarh News: मंडी में खुले में रखे फसल से भरे कट्टे भीगे

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नई अनाज मंडी में बारिश में खुले में रखे कट्टे। संवाद
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रेवाड़ी। जिले में सोमवार को सुबह से लेकर शाम तक लगातार बूंदाबांदी का दौर जारी रहा। मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद मंडी की तैयारियों में कुछ खामियां सामने आईं जिससे अनाज मंडी में रखे फसल के कुछ कट्टे भीग गए।
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नई अनाज मंडी में कट्टों में भरकर रखी फसल को बारिश से बचाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। मंडी के कोर्ट रोड की तरफ आने वाले सीधे मार्ग पर पहली शेड के पास रखे अनाज कट्टे खुले में रखे गए थे, जिन पर तिरपाल नहीं ढकी गई थी।
इसके कारण यह फसल सीधे बारिश की बूंदों की चपेट में आ गई और गीली हो गई। वहीं पास में रखी फसल तिरपाल से ढकी हुई थी लेकिन नीचे पानी जमा होने की वजह से कट्टे भीग गए। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया।
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अनाज मंडी में सोमवार को कुल 1200 गेट पास कटे हैं। सरकारी खरीद अभी शुरू नहीं हुई थी लेकिन बारिश के कारण कार्य प्रभावित हो गया। कई किसान अपने अनाज को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल का उपयोग कर चुके थे जिससे उनकी फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित रही।
जिन किसानों ने अनाज कट्टों को खुला रखा था, उनका माल गीला हो गया जिससे उनके आर्थिक नुकसान का खतरा बढ़ गया। मानसून के दौरान अनाज मंडियों में इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए पूर्व तैयारी आवश्यक है।
कट्टों को ऊंचाई पर रखना, तिरपाल या अन्य जलरोधक सामग्री का इस्तेमाल करना और पानी के निकास की व्यवस्था करना जरूरी है। इससे किसानों की मेहनत और उत्पादन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।


तिरपाल से फसल को ढंकना पड़ रहा
किसान वेदपाल, मंडी में बने शेड के नीचे आढ़तियों ने अपना सामान रखा हुआ है। इस कारण किसानों को अपनी फसल खुले में डालनी पड़ रही है जहां वह बारिश से भीग रही है। किसानों को अपने स्तर पर ही तिरपाल से उपज को ढंकना पड़ रहा है। भारी बारिश के कारण बाजरे की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। इस वजह से किसान काफी परेशान हैं। फिर बारिश से किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
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मानकों पर नहीं खरा उतर रहा बाजरा


हैफेड के प्रबंध निदेशक मुकुल कुमार ने कहा कि है कि जो किसान मंडी में ई-खरीद पोर्टल के माध्यम से आढ़ती को बाजरा की फसल बेचने के लिए आएंगे, उन्हें सरकार की ओर से भावांतर भरपाई स्कीम का लाभ दिया जाएगा।

हैफेड के प्रबंध निदेशक मुकुल कुमार ने कहा है कि सरकार के मापदंड जो बाजरे की खरीद के लिए बनाए गए हैं, उस गुणवत्ता की आवक बहुत कम है। ई-खरीद के जरिए आढ़तियों ने जो बाजरा लिया है, उसका किसानों को भुगतान समय पर किया जाए।
भावांतर भरपाई के निर्धारित किए गए दाम 575 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ प्रदान किया जाए। मुकुल कुमार ने कहा कि यदि कोई बाजरा की ढेरी तय किए गए मापदंड के अनुरूप मिलती है तो उसकी सरकारी खरीद हो सकती है।

नई अनाज मंडी में बारिश में खुले में रखे कट्टे। संवाद

नई अनाज मंडी में बारिश में खुले में रखे कट्टे। संवाद

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