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बदला मौसम का मिजाज, बारिश के साथ ओले भी गिरे

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बरिश से भीग गया मंडी में रखा गेहूं। - फोटो : Bahadurgarh
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बहादुरगढ़। क्षेत्र में शुक्रवार को फिर से मौसम का मिजाज बदला। पिछले 2-3 दिनों से तेज हवाओं के चलने का सिलसिला जारी था। मगर शुक्रवार की सुबह मौसम फिर बदला और अचानक बारिश होनी शुरू हो गई। करीब एक-2 मिनट तक तो कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हुई। बारिश के दौरान खेतों में काफी किसानों की गेहूं की फसल भीग गई। अनाज मंडी में भी बोरियों व प्लास्टिक के कट्टों में भरा गेहूं भीग गया। मंडी में साफ-सफाई के अभाव में बारिश का पानी गेहूं की बोरियों के आसपास आकर भर गया। इससे गेहूं भीग गया। मंडी में खरीदे गए गेहूं का उठान धीमा होने पर कई किसानों ने खरीद एजेंसियों की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए और जल्द से जल्द गेहूं उठवाने की मांग की। इसके अतिरिक्त आढ़तियों ने कहा कि उठान हो जाए तो मंडी में किसानों के लिए गेहूं लेकर आने की जगह बन सके।
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बता दें कि मौसम विभाग की ओर से पहले ही बारिश होने को लेकर संभावना जताई गई थी। शुक्रवार की सुबह करीब 9 बजे के आसपास बारिश हुई। कुछ देर तक तेज बूंदाबांदी का दौर रहा। इस दौरान छोटे-छोटे ओले भी गिरे। बारिश व ओलों के गिरने से किसानों के साथ-साथ मंडी में आढ़तियों की भी चिंता बढ़ी रही। बारिश के चलते किसान खेतों से मंडी तक परेशान नजर आए। जो किसान मंडी में गेहूं को बेचने के लिए अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली में लेकर आए थे वे भी मौसम में बदलाव को देखते हुए पॉलीथिन से गेहूं की निकाली हुई फसलों को ढकते रहे। बरसात व ओले पडने के दौरान खेतों में खड़ी व कटी हुई फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था। लेकिन मंडी में गेहूं से भी बोरियों के भीग जाने के कारण गेहूं को नुकसान होने की संभावना हो सकती है।
इस बार कोराना महामारी के कारण खेतों में कटाई मजदूरों की संख्या बहुत कम रही। इस कारण काफी किसानों ने अपनी फसल की कटाई मशीन से कराई है। इस बार मौसम काफी मेहरबान भी रहा, जिससे फसल अच्छी हुई। लेकिन फसल कटाई के वक्त अचानक मौसम का मिजाज बिगड़ गया है। 80 से 85 प्रतिशत रकबे में तो गेहूं की फसल मशीन से कट चुकी है और बाकी में अभी कटाई चल रही है। इसके साथ-साथ खेतों में फसल के ढेर भी लगाए जा रहे हैं। बरसात के कारण कटाई व थ्रेसिंग कार्य रुक गया है। ऊपर से नुकसान भी हो रहा है। किसान रामकिशन, सुरेंद्र, मुकेश, भूप सिंह, रोहतास व नरेंद्र ने बताया कि जहां फसल का ढेर लगाया गया है वहां भी नुकसान है। पूरा ढेर भीगने के बाद उसे सुखाने के लिए फिर से अलग-अलग छोटी-छोटी ढेरी बनानी पड़ेगी। किसानों का कहना है कि पहले ही खेती घाटे का सौदा बनकर रह गई है, ऊपर से आसमान से पड़ रही आफत ने किसानों की कमर तोड़ने का काम किया है। बरसात से जिन किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है उन्होंने सरकार से उचित मुआवजा देने की मांग की है।
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