19jjrp14- सीआरपीएफ के सेवानिवृत्त एडीजी जसबीर गिल का स्वागत करते बिरोहड़ के ग्रामीण। स्रोत-ग्र
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साल्हावास। अपने पिता के कदमों के निशान ढूंढते हुए वीरवार को पंजाब सीआरपीएफ के सेवानिवृत्त एडीजी जसबीर गिल गांव बिरोहड़ पहुंचे। इस दौरान गांव का हुजूम जसबीर गिल को देखने के लिए उमड़ पड़ा। उन्होंने ग्रामीणों के साथ संयुक्त पंजाब की यादें सांझा की। ग्रामीणों ने उन्हें पगड़ी बांधकर सम्मानित किया।
1962 में जसबीर गिल के पिता मलकियत सिंगल बिरोहड़ स्कूल में हैडमास्टर के पद पर कार्यरत थे। पूर्व एडीजी अब 64 साल बाद पिता की सर्विस बुक को पढ़ते हुए उन जगहों पर पहुंच रहे हैं जहां पिता ने अपनी नौकरी के दौरान स्वर्णिम पल बिताए थे।
बिरोहड़ गांव में उन्होंने ग्रामीणों के साथ स्कूल का दौरा किया और उस कमरे में भी गए जहां कभी उनके पिता का कार्यालय होता था। स्कूल के उस कमरे में बैठकर भी उन्होंने कुछ पल शिक्षकों के साथ बिताए। गांव में ही एक पुराने मकान के चौबारे का निरीक्षण किया जहां पिता किराए पर रहते थे।
पूर्व एडीजी ने बताया कि 1952 में पिता ने केवल 90 रुपये में नौकरी शुरू की थी। गांव बिरोहड़ में वे 1962 में हैड मास्टर के पद पर कार्यरत रहे हैं। 1982 में उनके पिता प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत हुए थे और 1999 में उनका निधन हो गया था।
जसबीर गिल सेना में उनके साथी रहे बिरोहड़ गांव निवासी प्रेम सिंह सेवानिवृत्त डीआईजी से संपर्क कर यहां तक पहुंचे। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की सहायता के लिए धनराशि भी भेंट स्वरूप दी। प्राचार्य बलजीत, सरपंच प्रतिनिधि रविंद्र सहरावत, सूबेदार सुरेंद्र, जयप्रकाश सहरावत, रोहतास, डीपीई विजय सहरावत मौजूद रहे।