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Jhajjar-Bahadurgarh News: निजी अस्पताल नहीं कर सकेंगे फर्जीवाड़ा, स्वास्थ्य विभाग ने की जांच कमेटी गठित

Fri, 12 Jan 2024 10:17 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
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झज्जर। अकसर आयुष्मान पैनल में शामिल निजी अस्पतालों द्वारा इलाज नहीं किए जाने की शिकायत आती रहती हैं। अब स्वास्थ्य विभाग के पास ऐसी शिकायतें भी आ रही है, जिसमें अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीज के साथ मिलकर फर्जी तरीके से दाखिला कर सरकार से क्लेम लिए गए हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर पर पहल करते हुए सिविल सर्जन की तरफ से टीमों का गठन किया गया है।
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जांच टीम आयुष्मान पैनल पर स्थित निजी अस्पतालों की जांच करने का काम करेगी। इन टीमों को डिप्टी सीएमओ के अलावा स्थानीय मेडिकल ऑफिसर व दो-तीन अन्य कर्मचारियों को शामिल किया गया है। टीम सदस्य भी बार-बार बदलते रहेंगे ताकि जांच किसी प्रकार से प्रभावित न हो। एरिया के अनुसार ही डिप्टी सीएमओ और मेडिकल ऑफिसर व टीम के अन्य सदस्यों को बदला जाएगा। टीमों का गठन सिविल सर्जन की तरफ से कर दिया गया है। यहां बता दें कि जिले में 20 सरकारी और 27 निजी अस्पताल आयुष्मान के पैनल पर हैं। यहां पर आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को दाखिल होने के बाद उपचार दिया जाता है।


तीन लाख 30 हजार से ज्यादा लोगों के बने हैं कार्ड
जिले में लगभग 6 लाख 18 हजार लोगों के आयुष्मान कार्ड बनने हैं, लेकिन जिले में अब तक केवल 53.51 प्रतिशत लोगों ने कार्ड बनवाए हैं। इसके तहत 82 हजार 664 लोगों के आयुष्मान कार्ड, 2 लाख 45 हजार 142 लोगों ने चिरायु योजना के तहत कार्ड बनवाए हैं। इसी प्रकार से चिरायु एक्सटेंशन यानी 1500 रुपये 2934 लोगों ने कार्ड बनवाए हैं।
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28 हजार लोगों ने उठाया योजना के तहत लाभ
आयुष्मान योजना के तहत जिले में अब तक 28 हजार लोगों ने फायदा उठाकर अपना इलाज कराया है। आयुष्मान योजना के तहत मरीज को उपचार के लिए दाखिल होने पर ही लाभ मिलता है। इसके तहत ओपीडी नहीं होती है।



आयुष्मान योजना के तहत जिले में 20 सरकारी व 27 निजी अस्पताल पैनल पर हैं। निजी संस्थान मरीज के साथ मिलकर उसे गलत तरीके से दाखिल कर क्लेम नहीं ले सके, इसके लिए टीम बनाई गई है। इसमें डिप्टी सीएमओ, एमओ व अन्य कर्मचारी शामिल किए गए हैं। टीम समय-समय पर चेकिंग कर अपनी रिपोर्ट दे रही है। फिलहाल ऐसा कोई मामला सामने अभी नहीं आया है। यदि आता है तो उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया जाएगा।
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- डाॅ. ब्रह्मदीप सिंह, सिविल सर्जन, झज्जर
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