हरियाणा के जिलों में बिजली संकट की एक बड़ी वजह यूपी से भी मांग के मुताबिक बिजली न मिलना भी है। प्रदेश में 6500 मेगावाट की मांग के सापेक्ष केवल 3529 मेगावाट आपूर्ति मिल रही है। यूपी के मेरठ जिले के संक्रोनाइजेशन केंद्र से रोजाना तीन हजार मेगावाट बिजली की मांग की जा रही है लेकिन केवल 150 से 200 मैगावाट आपूर्ति मिल पा रही है। झज्जर के झाड़ली और खानपुर खुर्द के दोनों थर्मल पावर प्लांटों से बिजली मांग के अनुसार आपूर्ति न मिलने से बिजली संकट लगातार गहराता रहा है। झज्जर सहित कई जिलों में जबर्दस्त बिजली कटौती से लोग बेहाल हैं।
दरअसल गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की खपत भी बढ़ गई है। लिहाजा विद्युत उत्पादन संयंत्रों से बिजली की मांग बढ़ाकर की जा रही है लेकिन वहां भी उत्पादन कम होने से पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। हरियाणा के कई जिलों को यूपी के मेरठ संक्रोजाइजेशन केंद्र के अलावा झज्जर के झाड़ली और खानपुर खुर्द के दोनों थर्मल पावर प्लांटों से बिजली मिलती हे लेकिन कहीं से भी मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो रही। मेरठ से तीन हजार की मांग के अनुसार केवल 1500 से 200 मैगावाट आपूर्ति हो रही है।
वहीं उत्तर हरियाणा बिजली निगम के अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में झज्जर, खेदड़, यमुनानगर और पानीपत के बिजली उत्पादन सयंत्रों से 2529 मेगावाट बिजली मिल रही है, जबकि करीब एक हजार मेगावाट बिजली अन्य स्थानों से खरीदी जा रही है। डिमांड के अनुसार बिजली की उपलब्धता न होने के कारण जबर्दस्त कटौती हो रही है।
झज्जर के झाड़ली और खानपुर खुर्द के दोनों थर्मल पावर प्लांटों सेनियमानुसार 2020 मेगावाट बिजली प्रदेश को मिलनी चाहिए। उसके बाद हिसार के खेदड़, यमुनानगर और पानीपत के प्लांटों सेे होने वाला उत्पादन अलग हैं। झज्जर के थर्मल पावर प्लांटों से पूरी क्षमता पर चलने पर 2820 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है और इस में से 700 मेगावाट बिजली दिल्ली और 100 मेगावाट बिजली अन्य क्षेत्र को को मिलनी चाहिए। जबकि बिजली निगम के अधिकारियों के मुताबिक इन दोनों प्लांटों से प्रदेश को पूरी बिजली नहीं मिल रही है। यहां से दिल्ली और अन्य क्षेत्रों को बिजली आपूर्ति की जा रही है।
झज्जर के झाड़ली गांव के इंदिरा गांधी सूपर थर्मल पावर प्लांट में पैदा होने वाली 1500 मेगावाट बिजली में से दिल्ली और हरियाणा को 700-700 मेगावाट बिजली मिलती है, जबकि सौ मेगावाट बिजली से प्लांट और बाकी बिजली अन्य क्षेत्रों को दी जाती है। महात्मा गांधी सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट से 1320 मेगावाट बिजली प्रदेश को मिलनी चाहिए, लेकिन यहां से भी प्रदेश को पूरी बिजली नहीं मिल पा रही है।
दी जा रही है।
न तो मेरठ संक्रोनाइजेशन केंद्र से मांग के अनुसार बिजली मिल पा रही है और न ही झज्जर के थर्मल पावर प्लांटों से बिजली मिल रही है। इसके कारण बिजली संकट चल रहा है। - प्रदीप कुमार, कार्यकारी अभियंता, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम, झज्जर।
इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्लांट से शेयर के मुताबिक बिजली हरियाणा को दी जा रही है। पूरी क्षमता पर प्लांट से बिजली का उत्पादन हो रहा है। - सोमेश बंदोपाध्याय, इंदिरा गांधी सूपर थर्मल पावर प्लांट, झाड़ली।