26jjrp12- प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को जानकारी देते निदेशक उमेश गोरिया। स्रोत-आयोजक
झज्जर। पंजाब नेशनल बैंक का ग्रामीण स्वरोजगार केंद्र महिलाओं को विभिन्न ट्रेड में प्रशिक्षित कर रहा है। यहां महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पाॅर्लर, अगरबत्ती निर्माण, कंप्यूटर हार्डवेयर नेटवर्किंग, वस्त्र निर्माण, आचार, पापड़, मसाले सहित 55 से अधिक कोर्सों की निशुल्क ट्रेनिंग दी जा रही है। वहीं, कई महिलाएं इन कोर्साें को पूरा कर अपना खुद का स्वरोजगार शुरू कर चुकी हैं।
पिछले कई सालों से ग्रामीण स्वरोजगार केंद्र पुरानी तहसील रोड स्थित रेडक्रास कार्यालय की बिल्डिंग में चल रहा है। यहां पर छह दिन से लेकर 45 दिन तक कोर्स करवाए जाते हैं। कोर्स करवाने के बाद बैंक से ऋण उपलब्ध करवाने का काम भी संस्थान की तरफ से किया जाता है।
यहां पर 18 से 45 साल के ग्रामीणों को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। भोजन और ठहरने की व्यवस्था भी है। यह स्वरोजगार प्रशिक्षण भारत सरकार से प्रमाणित है। कोर्स पूरा करने के बाद प्रमाण पत्र भी दिया जाता है। अब तक काफी संख्या में महिलाएं अलग-अलग कोर्स का प्रशिक्षण ले चुकी हैं।
गांव बाकरा में सिलाई का प्रशिक्षण शुरू किया गया
पंजाब नैशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की तरफ से गांव बाकरा में सिलाई का प्रशिक्षण शुरू किया गया है जिसमे 35 महिलाएं भाग ले रही हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक उमेश गोरिया ने की। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को बताया कि आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को तभी सार्थक किया जा सकता है। जब युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर अपना स्वरोजगार शुरू करें। ऐसा करके दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर प्रदान कर सकते हैं।
जुट उत्पाद के बारे में भी किया जागरूक
ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और बेरोजगार वर्ग को स्वरोजगार के जुट उत्पाद बनाने के बारे में भी अवगत कराया। संस्थान के निदेशक उमेश गोरिया ने कहा कि जूट एक प्राकृतिक, बायोडिग्रेडेबल और पर्यावरण के अनुकूल फाइबर है जिसे बढ़ावा देकर हम न केवल प्रदूषण को कम कर सकते हैं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना सकते हैं। प्लास्टिक के विकल्प के रूप में जूट उत्पादों को बढ़ावा देना आवश्यक है। इस अवसर पर संस्थान से आशीष रोहिल्ला, सतपाल सिंह, आशीष शर्मा, कुसुम, प्रिया मौजूद रहे।