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प्रवासी मजदूरों की व्यथा, बोले- 'पुलिस की मार से अच्छा है, पैदल जाना, हमें बार्डर पार करने दें'

Tue, 19 May 2020 12:09 PM IST
रोहतक ब्यूरो अमर उजाला, झज्जर
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दिल्ली-रोहतक रोड पर मौजूद श्रमिक व पुलिस
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हम बहुत परेशान हो चुके हैं, हमने सरकार से हर तरह से गुजारिश करके देख ली। हमने घर जाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी कराया। लेकिन न तो हमारे लिए ट्रेन की व्यवस्था हुई और न बस की। हमने तय किया है कि अब हम पैदल ही अपने गांव चले जाएंगे। लेकिन यहां अब पुलिस हमें बार्डर पार नहीं करने दे रही है। दो दिन हो गए यहां के चक्कर काटते-काटते, लेकिन हम आगे नहीं जा पा रहे हैं। यह व्यथा है प्रवासी मजदूरों की।
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उन्होंने कहा कि हमें सरकार से कोई मदद नहीं चाहिए। हम बस इतना चाहते हैं कि सरकार बार्डर पार करने दे। बाकी हम खुद किसी भी तरह से अपने घर चले जाएंगे। यह कहना था कि रोहतक से पैदल चलकर यहां पहुंचे संतोष कुमार और चमनलाल का। चमन लाल और संतोष को उत्तर प्रदेश के बलिया के पास अपने गांव जाना था।

लेकिन कोई साधन नहीं होने और पैदल चलकर आने की वजह से पुलिस ने उन्हें बहादुरगढ़ के टिकरी बार्डर पर रोक दिया। पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया। उन लोगों की बेबसी और परेशानी उनकी बातों में साफ झलक रही थी।
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प्रशासन की ओर से की गई है पुख्ता व्यवस्था
डीएसपी अजायब सिंह का कहना है कि प्रशासन की ओर से प्रवासी लोगों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए पूरी व्यवस्था की गई है। यह लोग अपनी मर्जी से सड़कों के जरिये अपने घरों तक जा रहे हैं। बहादुरगढ़ से हजारों श्रमिकों को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में पहुंचाया जा चुका है।
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