सेक्टर-2 मोड़ पर 19 फरवरी की रात को हुई सड़क दुर्घटना के मामले में सोमवार को नया मोड़ आ गया। घायल व्यक्ति के दम तोड़ने के बाद परिजनों और परिचितों में रोष पनप गया। गुस्साए लोग सराय औरंगाबाद रोड स्थित एक यूनिवर्सिटी का घेराव करने चल दिए। रास्ते में रोकने के लिए आई पुलिस से भी लोगों की झड़प हो गई। सड़क पर शव रख लोगों ने खूब हंगामा किया।
दरअसल, मूलत: बिहार निवासी मुकेश साहनी पिछले करीब 15 साल से बहादुरगढ़ के पटेल नगर में रह रहा था। वह मजदूरी करता था। गत 19 फरवरी को वह अपने मामा जगदीश के साथ किसी काम के सिलसिले में कहीं गया हुआ था। रात को लौटते वक्त जब सेक्टर-दो मोड़ पर पहुंचे तो यहां एक गाड़ी से बाइक की टक्कर हो गई। इस हादसे में दोनों घायल हो गए। मुकेश को गंभीर चोट आई। उसे इलाज के लिए दिल्ली के एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया, जहां उपचार के दौरान मुकेश ने दम तोड़ दिया। इस संबंध में जगदीश की शिकायत पर गाड़ी चालक पर केस दर्ज हुआ था। जिस इंडेवर गाड़ी से यह एक्सीडेंट हुआ, वह सराय औरंगाबाद स्थित एक यूनिवर्सिटी की थी।
दरअसल, मुकेश ने शनिवार की शाम को दम तोड़ दिया था। रविवार को पोस्टमार्टम नहीं हो सका। इसलिए पुलिस सोमवार को पोस्टमार्टम करा शव बहादुरगढ़ लाई। दोपहर को जब दाह संस्कार के लिए तैयारियां चल रही थी तो लोग भड़क गए। लोगों ने उचित मुआवजे की मांग उठा दी। कुछ देर तक यूनिवर्सिटी के लोगों का इंतजार किया। कोई नहीं आया तो लोगों ने यूनिवर्सिटी के घेराव की योजना बनाई। चार बजे करीब 400 लोग शव वाहन समेत यूनिवर्सिटी का घेराव करने चल दिए। सेक्टर-दो में ब्रह्माकुमारी भवन के पास पुलिस ने लोगों को रोकना चाहा तो उग्र हो गए। कुछ पुलिसकर्मियों के साथ भी लोगों की तीखी झड़प हुई। एक पुलिसकर्मी पर तो एक महिला ने हाथ भी उठा दिया। इसके बाद लोग शव को ही कंधों पर उठा कर चल दिए। इसके बाद पुलिस ने जब दोबारा रोका तो शव सड़क पर रखा और नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना मिलते ही तमाम थानों के एसएचओ, सीआईए इंचार्ज डीएसपी अजायब सिंह, डीएसपी राहुल देव भी लोगों को शांत कराने के लिए मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों के समझाने पर माने
लोगों ने अधिकारियों से कहा कि मुकेश चार बच्चियों का पिता था। उसकी मौत से इन बच्चियों के सिर से पिता का साया उठ गया। इन बच्चियों का पालन पोषण कौन करेगा। प्रशासन को पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आना चाहिए, लेकिन पुलिस कर्मी तो हमें ही रोकने के लिए आ गए। हम घेराव करने नहीं, बस अपनी बात रखने के लिए जा रहे थे। लोगों की बात सुनकर अधिकारियों ने उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इसके बाद लोग शांत हुए और करीब दो घंटे बाद लौट गए।
एसएचओ ने दी नसीहत
खुद को समाजसेवी बताने वाले एक शख्स द्वारा लोगों को भड़काने की बात सामने आ रही है। इस शख्स के साथ एक एसएचओ के साथ तीखी बहस हुई। एसएचओ ने उसे मामले में राजनीति न करने की नसीहत दे डाली। इसके बाद उक्त शख्स पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से एसएचओ की शिकायत करने लगा। इस शख्स पर पहले भी एक बार जाम लगाने के मामले में केस दर्ज हो चुका है।
परिजनों ने जब शिकायत दी थी, तभी केस दर्ज कर लिया गया था। लोगों के विरोध की सूचना मिली तो तमाम पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत करा दिया गया। मामले में आरोपी चालक को काबू किया जा चुका है। पीड़ित परिवार की मदद की जाएगी। रही बात पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की तो, ये उनके संज्ञान में नहीं आया है।
अजायब सिंह, डीएसपी, बहादुरगढ़।