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सीजेपी जंतर-मंतर प्रदर्शन: पैलेट गन के छर्रों ने छीनी आंख की रोशनी, झज्जर के साहिल का खाकी पहनने का सपना टूटा

Tue, 25 Aug 2026 02:20 PM IST
Naveen संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा)

सार

साहिल ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान अचानक शरीर के दाहिने हिस्से पर कुछ फटने जैसा महसूस हुआ। पीछे मुड़कर देखा तो नीली वर्दी पहने एक व्यक्ति के हाथ में बड़ी बंदूक थी। 
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पीड़ित साहिल लोहचब - फोटो : संवाद
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विस्तार
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काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के छर्रे लगने से आंख की रोशनी गंवाने वाले बूपनियां गांव के साहिल लोहचब दिल्ली पुलिस में भर्ती होकर दिव्यांग पिता का सहारा बनना चाहते थे लेकिन उनका यह सपना टूट गया है। आंख की रोशनी जाने वह अब मेडिकल परीक्षा पास नहीं कर सकते।

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मूल रूप से बूपनियां गांव निवासी साहिल का परिवार दस साल पहले दिल्ली के नजफगढ़ में किराए के मकान में रहने लगे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण साहिल ने पढ़ाई के साथ कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। उनके पिता दीपक दिव्यांग हैं और परिवार की आय का मुख्य साधन टैक्सी चलाना रहा है। साहिल भी टैक्सी चलाकर परिवार के खर्च में सहयोग करते थे। साहिल दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं।
साहिल ने बताया कि कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थाने में उन्होंने कई बार संपर्क किया लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई। शुक्रवार को राहुल गांधी के संसद मार्ग थाने पहुंचने के करीब छह घंटे बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया। अब उन्हें आगे पुलिस की कार्रवाई का इंतजार है। पुलिस जांच में स्पष्ट करे कि पैलेट गन किसने चलवाई है। उनकी आंख की रोशनी जाने का जिम्मेदार कौन है।
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दाहिने हिस्से में कुछ फटने जैसा महसूस हुआ था
साहिल ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान अचानक शरीर के दाहिने हिस्से पर कुछ फटने जैसा महसूस हुआ। पीछे मुड़कर देखा तो नीली वर्दी पहने एक व्यक्ति के हाथ में बड़ी बंदूक थी। इसके बाद उनकी आंख, चेहरे, हाथ और छाती से खून निकलने लगा और दाहिनी आंख से दिखाई देना बंद हो गया। उपचार के दौरान राहुल गांधी की टीम से उनका संपर्क हुआ। साहिल के मुताबिक, टीम ने इलाज और परिवार की मदद की।

भविष्य पर प्रश्नचिह्न
साहिल दिन में चार से पांच घंटे टैक्सी चलाते थे। बाकी बचे समय में घर पर ही ऑनलाइन कोचिंग से दिल्ली पुलिस की तैयारी कर रहे थे। दाहिनी आंख की रोशनी जाने के बाद न तो पढ़ाई कर पा रहे हैं और न ही घर के काम में मदद। उसके सामने अब इलाज के साथ भविष्य की नई चुनौती खड़ी हो गई है।

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