बादली। गुभाना गांव में नहर टूटने से किसानों के खेतों में पानी भरने से काफी किसानों की फसल खराब हो गई है। किसानो ने करीब 35 एकड़ फसल खराब होने की बात कही है। उन्होंने खराब हुई फसल की गिरदावरी कराकर मुआवजे की मांग की। उधर पटवारी ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया है लेकिन किसान मुआवजे की मांग कर रहे है।
गुभाना गांव में दो दिन पूर्व नहर टूटने से उसका पानी खेतों में कटी हुई गेहूं में पानी भरने से किसानों को काफी नुकसान हुआ। पककर तैयार फसल भी जलमग्न हो गई जिसमें कई दिनों तक कटाई कार्य नहीं हो सकेगा। सूचना मिलने पर सिचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और नहर को बांटने के साथ ही खेतों से पानी निकासी के प्रबंध किए, लेकिन पानी का बहाव तेज और पानी ज्यादा होने से पानी की लेवल बढ़ गया जिससे पानी नहर से उतरकर खेतों में पहुंच गया।
रात के समय नहर से पानी बहने से कटाव बढ़ गया और करीब 35 एकड़ जमीन जलमग्न हो गई जबकि खेतों में जाने के प्रमुख रास्ते में भी पानी भर गया। ऐसे में जहां किसानों को फसल में नुकसान हुआ। रास्ते में पानी भरने से किसानों को खेतों में जाने का रास्ता नहीं मिला। जिन खेतों में की फसल कटी हुई थी वहां पर कटाई कार्य कई दिनों तक बाधित हो गया जबकि जो फसल कटी हुई थी वह भी खराब होने के कगार पर पहुंच गई।
किसान बोले-पानी का स्तर कम होना चाहिए
किसान सुरेश, जयसिंह, सोमबीर, धर्मपाल और दीपक का कहना है कि नहरी पानी के स्तर को कम किया जाएगा। किसानों की मांग है कि नहर की सफाई भी कराई जाए ताकि पानी के बहाव में बाधा न पहुंचे। साथ ही किसान जगबीर, नवीन, प्रदीप, मोनू और दीपक ने खराब हुई फसल की गिरदावरी कराने के बाद मुआवजे की मांग भी की है। अपै्रल माह में गेहूं व सरसों की कटाई व कढ़ाई कार्य होता है और सिंचाई कार्य मात्र 5 प्रतिशत ऐसी जमीन पर किया जाता है जहां फल व सब्जियों की खेती की जाती है। ऐसे में किसानों का कहना है कि इन दिनों नहरों में पानी न छोड़ा जाए तो किसानों के हित में होगा क्योंकि नहर टूटने से उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
वर्जन
खेतों से पानी निकासी के लिए पंपसैट लगाए गए है और करीब 50 प्रतिशत से ज्यादा पानी की निकास की जा चुकी हैं जबकि नहर को बांटने का काम भी पूरा हो चुका है।
दिनेश कुमार, एसडीओ सिंचाई विभाग