झज्जर। शहर के सामान्य अस्पताल में सोमवार को आम दिनों की अपेक्षा मरीजों की ज्यादा भीड़ देखने को मिली। सबसे ज्यादा मरीज बुखार, खांसी, जुकाम, सरदर्द, उल्टी व दस्त के मरीज ज्यादा इलाज करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। मरीजों को निशुल्क दवाएं मिलती हैं, लेकिन मरीजों के कार्ड पर लिखी जा रही चार दवाइयों में से दो दवाइयां बाहर की लिखी जा रही हैं। जबकि बाहर की दवाइयां लिखने पर प्रतिबंध लगाया गया है। उसके बाद भी नियमों के विरुद्घ बाहर की दवाई मरीजों के कार्ड पर लिखी जा रही हैं और मरीजों को दुकानों से महंगी दवाई खरीदनी पड़ रही हैं। इससे उन्हें आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
वहीं सामान्य अस्पताल में चिकित्सकों के 42 पद हैं। इनमें से केवल 14 चिकित्सक यहां पर कार्यरत हैं। सामान्य अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए ग्रामीण क्षेत्र के चिकित्सकों को बुलाया जाता है। जबकि कोई बड़ा हादसा हो जाए या कोई गंभीर हालत में मरीज आ जाए तो उसे रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया जाता है। कन्हवा गांव निवासी गुलाब सिंह ने बताया कि अस्पताल में बच्चे का इलाज करवाने के लिए आया था, लेकिन आधी ही दवाई अस्पताल से दी गई हैं, वहीं खांसी की दवाई व अन्य दवाई चिकित्सकों ने बाहर से लेने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि सरकार तो मरीजों को निशुल्क दवा देने का प्रचार कर रही है, लेकिन झज्जर के सामान्य अस्पताल में मरीजों को बाहर से दवाएं लिखी जा रही हैं।
गर्भवती पत्नी को इलाज के लिए सामान्य अस्पताल में लेकर पहुंचे प्रवासी श्रमिक सज्जाद व अमीना ने बताया कि काफी देर इंतजार करने के बाद उसकी पत्नी की जांच की गई और फिर उनको रोहतक रेफर करने के लिए कहा गया। काफी परेशानी आर्थिक व मानसिक तौर पर हो रही है, क्योंकि सामान्य अस्पताल में सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नजर ही आया। उन्होंने बताया कि वे तो शहर के सबसे बड़े अस्पताल में पहुंचे थे। यहां पर दवाइयां भी आधी ही दी है।
ओपीडी में रहती है सबसे ज्यादा भीड़
सामान्य अस्पताल झज्जर की तीन ओपीडी में अधिक भीड़ रहती है। जिनमें नेत्र विभाग, महिला रोग विभाग और मेडिसन विभाग शामिल हैं। अनेक प्रकार के सामान्य रोगी इस विभाग में आते हैं जिससे भीड़ रहती है। वहीं डॉ. प्रीती दुग्गल ने बताया कि तीन विभागों के अतिरिक्त ऑर्थो विभाग में काफी संख्या में लोग इलाज करवाने आते हैं। बाल रोग, दंत और ईएनटी आदि विभागों में काफी मरीज अपना इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं।