बहादुरगढ़। एमडीयू (महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय) में स्नातक कोर्स की फीस 5 गुना बढ़ाने और 3 साल की बजाय 4 साल का ग्रेजुएशन कोर्स करने की छात्र संगठन ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन (एआईडीएसओ) ने कड़े शब्दों में निंदा की है। साथ ही इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। एआईडीएसओ ने इसके खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।
एआईडीएसओ के जिला कमेटी सदस्य मंगल सिंह ने बताया कि एमडीयू ने बीकॉम और बीएससी की फीस 8592 से 40,660 रुपये और बीए कोर्स की फीस 8522 रुपये से 30660 रुपये कर दी। इसी तरह तमाम कोर्स की फीस बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि यह फीस वृद्धि खुली लूट है और यूनिवर्सिटी के दरवाजे छात्रों के लिए बंद करने का फरमान है। आरोप है कि एमडीयू प्रशासन केंद्र व राज्य सरकार के इशारे पर ऐसे काले कारनामे कर रहा है। यह फीस वृद्धि निसंदेह गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के शिक्षा के अधिकार का हनन है। एआईडीएसओ सदस्य मंगल सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करके ग्रेजुएशन को 3 साल की बजाय 4 साल का कर दिया। फीस वृद्धि और 4 साल का ग्रेजुएशन कोर्स शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण को बढ़ावा देने के लिए, बड़े कॉर्पोरेटों और प्राइवेट प्लेयर्स के लिए अधिक मुनाफा सुनिश्चित करने और उनके लिए लेवल प्लेइंग फील्ड मुहैया कराने के लिए ही उठाये गए कदम हैं। शिक्षा में ये बदलाव शिक्षा को वैश्विक बाजार में खरीद-फरोखत की वस्तु में बदल कर उससे अधिकतम मुनाफा लूटने की योजना का हिस्सा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी में 4 वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स का परीक्षण फेल हो चुका है, कुछ दिन पहले ही कर्नाटक सरकार ने 4 वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स को वापस लिया, फिर भी यहां सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन इसको लागू करने पर अड़ा हुआ है। एआईडीएसओ 2019 से ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस समय यूनिवर्सिटी और शिक्षा खतरे में है। इसे बचाने की जरूरत है। संगठन ने सभी छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों से इसके विरोध में आवाज उठाने की मांग की है।