---फोटो 1 : डिपो पर प्याज लेने पहुंची महिलाएं।
- फोटो : Bahadurgarh
बढ़ती कीमत को देखते हुए सरकार ने राशन डिपो पर सस्ते दाम में प्याज वितरण करने का कदम उठाया है। अब इसे चुनावी स्टंट कहें या फिर जनहितकारी कदम लेकिन शहरी क्षेत्र के लोगों को तो लाभ मिला है। शनिवार को बहादुरगढ़ के राशन डिपो पर 31 रुपये प्रति किलो के हिसाब से प्याज वितरण हुआ। पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर एक राशन कार्ड पर उपभोक्ता को 3 किलो प्याज दिए गए। बाजार से आधे से भी कम कीमत में प्याज मिले तो शहरी जनता खुश नजर आई लेकिन गांवों में प्याज वितरण नहीं हुआ तो ग्रामीण सरकार से खफा नजर आए।
दरअसल, बाजार में प्याज का दाम 50 से 70 रुपये प्रति किलो चल रहा है। लोगों को राहत देने के लिए हरियाणा सरकार की ओर से राशन डिपो पर प्याज वितरण शुरू किया गया है। उपभोक्ता को महीने में कुल 9 किलो प्याज मिलेगा। दस दिन के अंतराल में तीन-तीन किलो के हिसाब से मिलेगा।
ग्रामीण हुए खफा
इस योजना के तहत फिलहाल शहरी क्षेत्र में ही डिपो पर प्याज वितरण होगा। इस वजह से ग्रामीण क्षेत्र के पात्र परिवार इस सुविधा से महरूम रहे। ग्रामीण सरकार से खफा भी हो गए। जसोरखेड़ी निवासी सुरेंद्र, नीलोठी निवासी विकास आदि ने कहा कि गांव में भी तो गरीब लोग रहते हैं, तो फिर गांव में क्यों नहीं प्याज वितरण केंद्र बनाए गए। अब बहादुरगढ़ शहर उनके गांव से लगभग 16 किलोमीटर दूर है। एक बार में बहादुरगढ़ पहुंचने का भाड़ा 20 रुपये है। आने जाने का 40 रुपये हो गया। 40 रुपये किराये के और 31 रुपये की प्याज, ये तो वही 71 रुपये हो गए। फिर ग्रामीण पात्र परिवारों को कैसे मिलेगा लाभ
इन कैटेगरी को मिलेगा प्याज
सरकारी राशन डिपो से 31 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बीपीएल, एवाईवाई व ओपीएच कार्ड धारकों को प्याज बेचा जा रहा है। वितरण का यह कार्य शहरी क्षेत्र के अंदर आने वाले सभी डिपो के माध्यम से हो रहा है। इसमें डिपो होल्डर को भी एक रुपये का कमीशन दिया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार तीनों श्रेणियों में लाभ के दायरे में आने वाले परिवारों की संख्या 85 हजार से अधिक है। प्रति कार्ड होल्डर को एक माह में 9 किलोग्राम प्याज सस्ती दर पर मिलेगा। यानी 10 दिन के अंदर केवल 3 किलोग्राम प्याज उपलब्ध होगा।
अधिकारी बोले
मामला मेरे संज्ञान में आया है। वह इस संबंध में सरकार को पत्र लिखेंगे। प्रयास रहेगा कि ग्रामीण क्षेत्र में भी इस योजना का लाभ मिले।
- सुरेंद्र सैनी, डीएफएससी