-फोटो 84 : श्री पदम प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में पूजा अर्चना करते हुए श्रद्धालु। स्रोत समाज
बहादुरगढ़। दशलक्षण महापर्व के नौवें दिन वीरवार को जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम आकिंचन धर्म की उपासना की। गांधी चौक स्थित श्री पद्म प्रभ जैन मंदिर, अग्रवाल कॉलोनी व संत कॉलोनी के जैन मंदिरों तथा अनाज मंडी स्थित पांडूशिला पक्षी दाना स्थल पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
सकल जैन समाज के महासचिव अरविंद जैन और पांडूशिला समिति के प्रधान सुनील जैन ने कहा कि आकिंचन का अर्थ परिग्रह का त्याग करना है। परिग्रह जितना अधिक होगा, तनाव भी उतना ही बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने सम्मान के साथ-साथ इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि उसके व्यवहार से किसी दूसरे के आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचे। दूसरों के दर्द को समझने वाला व्यक्ति ही उनकी सच्ची मदद कर सकता है।
उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में संस्कारों की परीक्षा होती है और परिग्रह मनुष्य की शांति छीन लेता है। मोक्ष मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य है। इसके लिए प्रतिदिन कम से कम दो घंटे प्रार्थना, भक्ति और ध्यान के लिए निकालने चाहिए।
समाज की ओर से 26 सितंबर को शाम छह बजे श्री पद्म प्रभु दिगंबर जैन मंदिर परिसर में भजन संध्या होगी। दिल्ली की भजन गायिका अंकिता जैन प्रस्तुति देंगी। 27 सितंबर को क्षमावाणी पर्व पर बैंड-बाजों और आकर्षक झांकियों के साथ भव्य वार्षिक रथ यात्रा निकाली जाएगी।