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दो साल से लापता 8 साल के मासूम को परिजनों से मिलवाया, लॉकडाउन नहीं लगता तो होता ऑस्ट्रेलिया

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बच्चे के साथ परिजन व टीम। - फोटो : Jhjhar
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झज्जर। करीब दो साल पहले दिल्ली के मुंडका क्षेत्र से लापता हुए एक बच्चे को हरियाणा स्टेट क्राइम सेल की टीम ने उसके परिवार से मिलाया है। परिवार के लोग बच्चे से मिलकर काफी खुश हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते अगर लॉकडाउन नहीं लगता तो यह बच्चा अब तक आस्ट्रेलिया पहुंच गया होता। क्योंकि आस्ट्रेलिया में रहने वाली एक दंपती ने उसे गोद लेने के लिए आवेदन किया हुआ था। बच्चे को वहां भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी, लेकिन हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच ने इस बीच उनके माता-पिता को खोज लिया। सोमवार को बच्चा परिवार से मिलवा दिया गया। हरदोई से आए उसके परिजनों को भी बच्चे ने पहचान लिया।
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बता दें कि अनुज नामक यह मासूम दो साल पहले बहादुरगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया से मिला था। अनुज के पिता बबलू मूंडका स्थित एक फैक्टरी में काम करते थे। उस दौरान अनुज को उसके परिवार वालों ने खूब तलाश किया, लेकिन जब उसका कहीं कोई पता नहीं चला तो अनुज के मां-बाप अपने दिल पर पत्थर रखकर दिल्ली छोड़ अपने पैतृक गांव हरदोई चले गए थे। लेकिन दो साल पहले ही बहादुरगढ़ पुलिस को अनुज एक फैक्टरी के पास अकेले घूमता हुआ मिला। अनुज को न तो पढ़ना-लिखना आता था और न ही उसे बोलना आता था। इसके चलते वह पुलिस द्वारा उस दौरान की गई पूछताछ में कुछ भी ऐसा नहीं बता पाया, जिससे कि पुलिस उसके परिजनों तक पहुंच पाती। इसी के चलते पुलिस ने अनुज को पुलिस ने बहादुरगढ़ की उमंग चिल्ड्रेन होम को सौंप दिया।
परिजनों ने हरिपाल रखा था नाम
स्टेट क्राइम ब्यूरो के अनुसार वैसे तो अनुज के परिजनों ने इसका नाम हरिपाल रखा था। लेकिन चूंकि पुलिस के सामने वह कुछ भी बता पाने में वह असमर्थ था, इसी के चलते सामाजिक संस्था उमंग ने ही उसे अनुज का नाम दिया। दो साल से ही वह उक्त संस्था में रह रहा था। उसका खानपान और बोली हरियाणवी हो गई है, जबकि उसके माता-पिता पूरी तरह से यूपी की भाषा बोलते हैं। अनुज के माता-पिता अनपढ़ हैं। अनुज ने बाल भवन में पढ़ना शुरू कर दिया था और कुछ ही दिनों बाद अनुज का प्राइवेट स्कूल में एडमिशन भी होना था। क्राइम ब्रांच के एसआई राजेश कुमार जोकि चिल्ड्रेंस होम का दौरा करते रहते हैं। उन्हें अनुज के बारे में पता चला। अनुज को केवल अपने आसपास के गांवों के बारे में पता था। जिसके आधार पर एएसआई राजेश कुमार ने अनुज के माता-पिता को खोज लिया।
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लॉकडाउन न होता तो अनुज पहुंच जाता आस्ट्रेलिया
कोरोना संक्रमण के कारण अगर लॉकडाउन नहीं लगता तो अनुज अब तक ऑस्ट्रेलिया जा चुका होता। एक ऑस्ट्रेलियन परिवार ने अनुज को गोद लेने के लिए प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी और लगभग सारा काम पूरा भी हो चुका था। लेकिन लॉकडाउन के कारण अनुज ऑस्ट्रेलिया नहीं जा सका। इसी बीच पुलिस को अनुज के माता-पिता के बारे में पता चल गया। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने तमाम डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद उसके पिता बबलू को सौंप दिया।
सितंबर में मैं चिल्ड्रेन होम आया था। उस समय बच्चे से मुलाकात हुई थी। बच्चे ने कुछ हलकी सी जानकारी गांव के बारे में दी थी। उसके आधार पर मामले की तह तक पहुंचने पर उसके माता-पिता का सुराग मिल गया। हरदोई की पुलिस से संपर्क साध कर उसके माता-पिता का पता लगाया गया तो इस मामले में सफलता मिल गई। बच्चे को उसके माता-पिता को सौंप दिया है।
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- राजेश कुमार, एसआई हरियाणा स्टेट क्राइम सेल।

कागजात पर हस्ताक्षर करता बच्चा।- फोटो : Jhjhar

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