बेरी। करीब 10 हजार की आबादी वाले गांव माजरा-दूबलधन में धर्मशाला में चल रही पीएचसी को लेकर ग्रामीणों ने मांग की है कि पीएचसी के भवन का निर्माण किया जाए। इससे ग्रामीणों को पीएचसी के नए भवन में सभी सुविधाएं मिल सके।
पीएचसी को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि 1992 में काहनौर व मातनहेल के माजरा पीएचसी बनी थी। इन दोनों को सीएचसी बना दिया गया है, लेकिन माजरा पीएचसी भवन कंडम होने के साथ यहां सुविधाएं भी कम हो गई। बता दे कि माजरा पीएचसी का शिलान्यास पत्थर 5 अप्रैल 1987 को तत्कालीन राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह ने रखा था। 5 वर्ष तक बनने के बाद हरियाणा की तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री करतार ने 6 अप्रैल 1992 को इसका उद्घाटन किया था। परिसर में डॉक्टर, स्टाफ के क्वार्टर भी बनाए गए थे। जो अब पीएचसी का भवन व क्वार्टर जर्जर हालत में सुनसान पड़े हैं। माजरा दूबलधन की पीएचसी में 90 के दशक में जच्चा बच्चा व अन्य विभागों की ओपीडी कार्यरत थी।
ग्रामीण दयानंद कादयान, जसवीर, जयभगवान आदि का कहना है कि गांव माजरा पीएचसी में गांव माजरा के अलावा सिवाना, चिमनी, दूबलधन, मलिकपुर, सफीपुर और भिवानी जिले के भी बास, बिगोवा, पिलाना व मोरवाला के मरीज इलाज हेतु आते थे। अब यह पीएचसी गांव मंदिर के साथ एक धर्मशाला में चल रही है। इसके बाद पीएचसी की विभिन्न ओपीडी बंद कर दी गई। आज प्रसव के लिए यहां की महिलाओं को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। जननी सुरक्षा योजना व अन्य लाभार्थियों को दूबलधन व बेरी के तक जाना पड़ता है।
2017 में बंद हुई थी डिलीवरी
बता दे कि जब सरकारी भवन में पीएचसी चलती थी तब वहां पीएचसी में बच्चों की डिलीवरी भी होती थी, लेकिन भवन कंडम होने के बाद यहां पर डिलीवरी भी बंद कर दी गई थी। करीब 2 किलोमीटर दूर दूबलधन अस्पताल में डिलीवरी सुविधा है।
गांव माजरा पीएचसी के भवन को 2019 में कंडम घोषित कर दिया था। उसके बाद से ही मंदिर के पास बनी धर्मशाला में पीएचसी चल रही है। पीएचसी में 12 सदस्यों का स्टॉफ है और पीएचसी में डिलीवरी वर्ष 2017 से बंद है, डिलीवरी के 2 किलोमीटर दूरी पर दूबलधन में अस्पताल है और वहां डिलीवरी की सुविधा है।
डॉ. हर्षदीप, इंचार्ज, पीएचसी माजरा-दूबलधन
28jjrp08- दूबलधन माजरा पीएचसी की कंडम बिल्डिंग। स्रोत-ग्रामीण
28jjrp08- दूबलधन माजरा पीएचसी की कंडम बिल्डिंग। स्रोत-ग्रामीण