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किक बॉक्सर कुसुम की मदद को आगे आए मंत्री धनखड़ कोरिया आने-जाने के खर्च की व्यवस्था करने का एलान

Sun, 28 Aug 2016 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
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किक बॉकिसंग - फोटो : bureau
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गांव गोयला की किक बॉक्सर कुसुम की मदद के लिए सरकार आगे आई है। कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने कुसुम के कोरिया आने-जाने के खर्च की व्यवस्था करने का एलान किया है। इससे कुसुम, उसके कोच, परिजन और प्रशंसक बेहद खुश हैं।
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सितंबर में कोरिया में किक बाक्सिंग चैंपियनशिप होने जा रही है, जिसमें पूरे देश से केवल तीन लड़कियों का चयन हुआ है। इनमें गांव गोयला की कुसुम हरियाणा की एकमात्र खिलाड़ी है, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते कुसुम के कोरिया दौरे पर संकट मंडराने लगा था। यह बात जब कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ तक पहुंची तो उन्होंने कुसुम की मदद करने का फैसला किया। उन्होंने कुसुम के आने-जाने की व्यवस्था करने की घोषणा कर दी। गांव गोयला की पंचायत भी कुसुम की मदद के लिए आगे आई है। कुसुम 10 सितंबर को कोरिया के लिए रवाना होगी। जाहिर है इस तरह के कदम से कुसुम का हौसला बढ़ेगा। खेल प्रेमियों को अब कुसुम से मेडल की उम्मीद है। उधर, कुसुम भी उत्साह से लबरेज है।


माता-पिता ने मंत्री का जताया आभार
इस मदद पर कुसुम के माता-पिता ने कृषि मंत्री ओपी धनखड़ का आभार जताया। अपनी बेटी की उपलब्धियों से पिता गुलाब सिंह बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि बेटे से बढ़कर है मेरे लिए यह बेटी। इसी प्रकार माता बाला भी मदद मिलने की घोषणा पर प्रसन्न है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी का सपना गोल्डन गर्ल बनना है।
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खिलाड़ी की मदद को तैयार : धनखड़
हरियाणा के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने कुसुम की मदद का एलान किया है। बाक्सिंग संघ के अध्यक्ष के नाते धनखड़ ने कहा कि कुसुम को कोरिया जाने में परेशानी नहीं होगी। उसकी व्यवस्था वे कराएंगे। साथ ही वे कहते हैं कि किसी भी खिलाड़ी की मदद को तैयार हैं। उनका मकसद खेलों को बढ़ावा देना है। किक बाक्सिंग के मामले पर भी वे कहते हैं कि छात्रा खेलकर आगे बढ़ रही है, हम मदद करेंगे।


आठ बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जीत चुकी गोल्ड
कुसुम 60 किलोग्राम भार वर्ग के खिलाड़ियों की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर रही है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दुल्हेड़ा में फिलहाल 11वीं कक्षा की छात्रा कुसुम ने 8वीं से किक बाक्सिंग खेलना शुरू किया था। अपने कोच जसवंत सिंह के मार्गदर्शन में कुछ ही महीने के प्रशिक्षण, अभ्यास के बाद कुसुम ने जिस भी प्रतियोगिता में भाग लिया, उसी में गजब का खेल दिखाया। गांव में इलेक्ट्रीशियन का काम करने वाले कुसुम के पिता गुलाब सिंह अपनी बेटी को खेलने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते हैं। यही कारण है कि कुसुम लगभग हरेक मुकाबले में पदक जीतती है। कोच जसवंत सिंह कहते हैैं कि कुसुम जब भी खेलती है जीत के लिए ही खेलती है। वह अब तक आठ बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल प्राप्त कर चुकी है।
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कुसुम की उपलब्धियां
-फरवरी-2016 में दिल्ली में हुई दिल्ली प्रो-किक बाक्सिंग में श्रेष्ठ फाइटर का खिताब जीता।
- महाराष्ट्र के पुणे में 9 अगस्त 2015 को हुई एशियन किक बाक्सिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
- अक्तूबर 2014 तक पुणे में ही हुई जूनियर नेशनल किक बाक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक
-फरवरी-2016 दिल्ली में हुई जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड
- फेडरेशन कप 2015-16 में गोल्ड
-मार्च 2015 तक पुणे में हुई लॉ किक सीनियर नेशनल चैंपियनशिप-15 में रजत।
-सितंबर 2014 को दुल्हेड़ा में हुई पहली झज्जर जिला किक बाक्सिंग चैंपियनशिप में दूसरा स्थान
-जून 2015 को झज्जर जिला चैंपियनशिप में प्रथम
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