झज्जर के बेरी में विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी माहौल जोर पकड़ रहा है। मतदाता चुनाव को लेकर चर्चा कर रहे हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि पार्टी कोई भी जीते, पर उनकी छोटी-छोटी समस्याएं खत्म होनी चाहिए। चुनाव के समय नेता जो वादे करते हैं, उन्हें जितने के बाद सब भूल जाते हैं।
बेरी हलके में चुनावी चर्चा में भाग लेते हुए मतदाताओं ने कहा कि नेता चुनाव के समय तो नेता खूब वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब भूल जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि किसी पार्टी विशेष से कोई वास्ता नहीं है। मगर क्षेत्र में विकास कार्य होना चाहिए। ग्रामीण इस बार जाति, धर्म के नाम के बजाय खेती-किसानी के मुद्दे पर वोट करने पर जोर दे रहे हैं।
चुनावी चर्चा के दौरान अमित कौशिक ने कहा कि मौजूदा सरकार में युवा बिना पर्ची-खर्ची सरकारी नौकरी तो लगे हैं, लेकिन फिर भी सरकार ने गंभीरता से काम नहीं किया। हर वर्ग के कर्मचारी इसी सरकार के दौरान धरने पर बैठे थे। कभी शिक्षक तो कभी सरपंच तो कभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, हर कोई अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे रहे।
वहीं ओमबीर ने कहा कि सरकार ने किसानों के साथ भी अन्याय किया है। साथ ही सरपंचों पर भी लाठियां बरसाई गई। किसान ईश्वर ने कहा कि इस बार कांग्रेस और भाजपा में ही कड़ा मुकाबला दिख रहा है। बाकी पार्टियां भी जोर लगा रही है। किसके सिर पर जीत का सेहरा सजेगा , यह तो 8 अक्तूबर को ही पता चलेगा। राजेंद्र सिंह ने कहा कि विधायक ऐसा चुनना चाहिए, जो ईमानदारी से काम करें। आम जनता के बीच में रहने वाला नुमाइंदा होना चाहिए। गांधी मिस्त्री ने कहा कि इस समय हर विभाग में भ्रष्टाचार बढ़ा हुआ है।
विधायक कोई बन जाए, आम आदमी को तो इसी तरह जूझते रहना है। गरीब आदमी की सबसे अधिक मार होती है। नेता तो पूरे पांच साल मौज करते हैं। फिर जनता उनके पीछे-पीछे फिरती रहती है। वहीं आनंद प्रकाश ने कहा अभी तो चुनावी माहौल बन रहा है। 25 सितंबर के बाद चुनाव और जोर पकड़ेगा। इसके बाद एक अक्तूबर से प्रत्याशी खुद की हार को जीत में बदलने और प्रतिद्वंदी की जीत को हार में बदलने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाएंगे।