छुट्टी के अगले दिन कर्मी तरोताजा और पेंडिंग काम को निपटाते हुए नजर आते हैं लेकिन ऐसा सरकारी कार्यालयों में शायद नहीं होता है। बता दें कि सोमवार को जहांगीरपुर गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जिला परिषद चेयरमैन पमजीत सौलधा दोपहर को मुआयना करने पहुंचे। उन्हें कोई भी चिकित्सक और कर्मचारी नहीं मिला। हरेक स्वास्थ्य कर्मी की कुर्सी खाली थी।
जिप चेयरमैन करीब 3 बजे जहांगीरपुर गांव स्थित पीएचसी पहुंचे तो उन्हें पीएचसी की 4 में से कोई एएनएम नहीं मिली। अस्पताल में 2 से 7 बजे तक की शिफ्ट में कार्यरत एकमात्र स्टाफ नर्स उर्वशी मौजूद थीं। मगर सुबह 9 से 4 बजे तक की ओपीडी वाली चारों एएनएम गायब थीं। गायब हो भी क्यों न, जब अस्पताल प्रमुख एमओ की ही कुर्सी खाली हो तो अन्य कर्मचारी कोई जिम्मेवारी भला कैसे समझेगा। परमजीत ने अस्पताल में मौजूद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से बातचीत की तो पता चला कि एमओ ज्योति दहिया दोपहर को अस्पताल से चली गई थी और अक्सर ऐसा होता है कि उनके जाते ही बाकी कर्मचारी भी चले जाते हैं। ऐसे में सुविधाओं का भला क्या होगा। चेयरमैन परमजीत ने बताया कि चिकित्सकों की शिकायत सरकार, हलका विधायक एवं मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। सरकार ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है मगर चिकित्सकों की लापरवाही का भुगतान रोगियों को करना पड़ रहा है जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चतुर्थ श्रेणी ने की मरहम पट्टी
परमजीत के औचक निरीक्षण में एक सड़क दुर्घटना का में जख्मी युवक अस्पताल पहुंचा। मगर चिकित्सक न होने की स्थिति में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने ही मरहम पट्टी की। युवक दर्द से बिलखता रहा, मगर चिकित्सक नहीं था। यह युवक मोटर साइकिल फिसलने से जख्मी हुआ था।
नहीं है एंबुलेंस सुविधा
पीएचसी में एंबुलेंस सुविधा नहीं है। जबकि डिलीवरी के लिए स्टाफ नर्स की ड्यूटी 24 घंटे होती है। अस्पताल में मौजूद स्टाफ नर्स उर्वशी ने बताया कि पिछले कई दिनों से एंबुलेंस सुविधा नहीं है। जरूरत होने पर झज्जर से एंबुलेंस मंगवानी पड़ती है। एंबुलेंस समय पर न मिलने के कारण सबसे बड़ी दिक्कत गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ती है। इसी का परिणाम है जहां पीएचसी में 60 से 70 डिलीवरी प्रति माह होती थी वहीं अब 20-25 डिलीवरी भी एक माह में नहीं हो पा रही है। एंबुलेंस महिलाओं को सीधा झज्जर अस्पताल ले जाती हैं या फिर महिलाओं को एंबुलेंस न मिलने के चलते अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
सुनिए जरा, क्या कहती हैं एमओ
अस्पताल में नहीं मिलने पर जब इस मामले में एमओ डॉ. ज्योति दहिया से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि वह किसी काम से झज्जर चली गई। उनके जाने के बाद अन्य कर्मचारियों के जाने के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। जब वह अस्पताल में निकली तो स्टॉफ नर्स अस्पताल में मौजूद थीं। ओपीडी में नियुक्त चार अन्य एएनएम के अस्पताल में न होने के बारे में डॉ. ज्योति से कोई जवाब नहीं मिला।