झज्जर। झज्जर के एक रियासत बनने से भी 10 वर्ष पहले एक आयरलैंड निवासी जार्ज थामस ने यहां अपना शासन स्थापित कर लिया था। उसको मराठों की तरफ से 1794 में झज्जर व आसपास का क्षेत्र जागीर के तौर पर प्रदान किया गया था।
खेड़ी जट निवासी इतिहासकार यशपाल गुलिया ने बताया कि जहाजगढ़ के तीन तरफ से भारावास थली व माजरा आदि से मराठा सेना आक्रमण करती रही। इसका जार्ज के तीन यूरोपीय कमांडरों ने सुनियोजित ढंग से मुंहतोड़ जवाब दिया। इस प्रकार जहाजगढ़ के इर्द-गिर्द महीने भर तक युद्ध होता रहा, जिसका सामान्य पाठ्य पुस्तकों में वर्णन ही नहीं है। झज्जर में रहते हुए जार्ज थामस को 1795-96 में बेरी वासियों से एक युद्ध लड़ना पड़ा था। उसके बाद जार्ज थामस ने अपनी स्वतंत्र सैन्य शक्ति बढ़ाकर एक नया किला बना लिया। उस किले का नाम जार्जगढ़ रखा, जो एक-दो शताब्दी के बाद जहाजगढ़ नामक गांव में परिवर्तित हो गया। किला बनाने के बाद दिल्ली दरबार की परवाह न करते हुए जार्ज ने महम, हांसी, हिसार तक के क्षेत्र पर अपना अधिकार कर लिया और अपने संपूर्ण अधिग्रहित क्षेत्र का नाम हरियाणा रखा। नवस्थापित राज्य की राजधानी फिर उसने 1998 में हांसी के किले में स्थानांतरित कर ली। इस प्रकार एक स्वतंत्र शासक के शक्तिशाली होता देखकर दिल्ली दरबार तक को खतरा अनुभव होने लगा। तब दिल्ली में नाममात्र का बादशाह शाहआलम मराठी के संरक्षण में था। और मराठों का सैन्य कमांडर एक फ्रांसीसी जनरल पैरों था। पैरों ने पहले तो जार्ज से बहादुरगढ़ बुलाकर वार्ता की, लेकिन वार्ता असफल होने पर अक्तूबर 1801 में भारी सैन्य शक्ति से जहाजगढ़-झज्जर आक्रमण कर दिया। पैरों की सेना में सिखों आदि अन्य देशी शासकों की सेना भी शामिल हो गई। इस प्रकार अकेले जार्ज की सेना ने मराठों की सेना का महीने भर तक मुकाबला किया।