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दो साल में दो कदम भी नहीं चली आईआईटी

Fri, 18 Dec 2015 12:17 AM IST
ब्यूूराो/अमर उजाला/बहादुरगढ़
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दो साल पहले गांव बाढ़सा में तत्कालीन हुड्डा सरकार ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) का शिलान्यास किया था। आईआईटी का शिलान्यास होने पर आसपास के युवाओं ने सुनहरे भविष्य के सपने देखे थे। मगर जमीनी स्तर पर देखें तो यह योजना पिछले दो साल में दो कदम भी आगे नहीं चल पाई है। शैक्षणिक हब बनाने की योजना फिलहाल फाइलों में ही दबी हुई है।
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झज्जर जिले का बाढ़सा गांव हमेशा से ही अच्छी परियोजनाओं के लिए प्रसिद्ध रहा है। सबसे पहले गांव में एम्स के लिए 300 एकड़ पंचायती जमीन का अधिग्रहण किया गया। एम्स-2 भी कछुआ चाल से पूरा हो गया और वर्तमान में रोगियों को ओपीडी की सुविधा भी उपलब्ध करा रहा है। इसके तुरंत बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने गांव में आईआईटी के लिए 125 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की। ग्रामीणों को लगा कि अब अच्छे दिन आने वाले हैं। इस प्रस्ताव को मंजूर कराने में रोहतक के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रयासों की सराहना होने लगी। प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने हुए 21 दिसंबर 2013 को बाढ़सा में तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री एवं आईआईटी कमेटी के सदस्य डॉ. एमएम पल्लमराजू और हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बड़े स्तर पर शिलान्यास समारोह भी किया।

अन्य योजनाएं भी
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के साथ साथ इस विस्तार में आईआईटी की ओर से स्किल डेवलपमेंट सेंटर और बायो साइसेंज रिसर्च पार्क शुरू किए जाने की योजना भी थी। समारोह में तत्कालीन केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. एमएम पल्लमराजू ने कहा था कि इस योजना का लाभ न केवल हरियाणा बल्कि साथ लगते प्रदेशों के युवाओं को भी मिल सकेगा और हरियाणा को भी पहचान मिलेगी।
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यह बोले ग्रामीण
ग्रामीण जोगेंद्र बाढ़सा का कहना है कि पूर्व की कांग्रेस सरकार में सांसद दीपेंद्र हुड्डा के प्रयासों से गांव में आईआईटी को मंजूरी मिली थी, मगर अब सरकार बदल जाने के बाद यह योजना पूरी होती दिखाई नहीं दे रही है। यदि आईआईटी खुलती है तो क्षेत्र के युवाओं को आधुनिक शिक्षा मिल सकेगी।

नहीं हो रहा काम
पूर्व सरपंच रणबीर ने कहा कि दो साल बीत जाने और शिलान्यास समारोह होने के बाद भी आईआईटी के नाम पर एक ईंट तक नहीं लगाई गई है। हालांकि इसके निर्माण के लिए 3-3 करोड़ रुपये की दो किस्तें आई हैं मगर निर्माण कार्य कहीं नहीं है। यह योजना गांव में सिरे चढ़ जाती है तो हरियाणा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नॉलेज कैपिटल के तौर पर विकसित हो सकता है।

काम शुरू कराया जाए
पूर्व जिला पार्षद अमित कुमार का कहना है कि सरकार को युवाओं के लिए कुछ करना ही है तो वह आईआईटी को स्थापित कर युवाओं के भविष्य को सुधारने का काम करे। सरकार चाहें किसी भी पार्टी की हो मगर मगर युवाओं के भविष्य को लेकर कोई राजनीति नहीं करनी चाहिए। जल्द से जल्द काम शुरू कराया जाए।

अधिकारी बोले
आईआईटी को लेकर अधिकारियों के पास भी कोई जवाब नहीं है। इस मामले में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी रामफल का कहना है कि उन्होंने आईआईटी के लिए 125 एकड़ जमीन उपलब्ध करा दी थी, मगर अब निर्माण कार्य कराना आईआईटी दिल्ली का काम है। इसके बाद अधिकारी के तौर पर उनसे जो मदद मांगी जाएगी, उसके लिए वह तैयार हैं। वहीं, एसडीएम अमरदीप जैन का कहना है कि पिछले एक साल से उनके पास इस योजना को लेकर बातचीत नहीं हुई
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है।

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