04jjrp07- सेहलंगा गांव की जमीन जिसका अधिग्रहण किया गया। यहां अब मकान भी बन चुके हैं। स्रोत-ग्र
- फोटो : samvad
झज्जर। जब भी कोई जमीन का खरीद-फरोख्त होती है तो पहले उसकी रजिस्ट्री करवाई जाती है और उसके बाद इंतकाल करवाया जाता है ताकि खरीद का पता लग सके लेकिन पीडब्ल्यूडी बीएंडआर की तरफ से 44 साल के बाद एक जमीन की रजिस्ट्री करवाई गई।
यह काम भी अधिकारियों ने अपनी मर्जी से नहीं किया बल्कि ग्रामीणों के बार-बार चक्कर काटने पर किया गया। 44 साल बाद इंतकाल हुआ लेकिन अब भी एक साल ऊपर होने के बाद भी संबंधित विभाग पैमाइश नहीं करवा रहा। हम यहां बात कर रहे हैं सेहलंगा गांव की।
वर्ष 1981 में बिरोहड़, खाचरौली, सेहलंगा और ढलनावास की दोनों तरफ की जमीन का अधिग्रहण लोक निर्माण विभाग ने किया था। दोनों तरफ कहीं पांच, कहीं 11, कहीं 16 तो कहीं 27 फीट का रास्ता लिया था। जिस जमीन का अधिग्रहण हुआ था उसका मुआवजा भी किसानों को मिल गया था।
जमीन अधिग्रहण करने के बाद उसकी रजिस्ट्री संबंधित विभाग के पास हो गई लेकिन लोक निर्माण विभाग उस जमीन का इंतकाल करवाना भूल गया।
किसान बार-बार विभाग से इंतकाल की मांग करते रहे लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 2025 में जाकर सुनवाई हुई और 1981 का रिकॉर्ड ढूंढा गया। इसके बाद सितंबर 2025 में जाकर विभाग की तरफ से पूरी जमीन का 187 पेज का इंतकाल करवाया गया।
इंतकाल होने के बाद अब विभाग लगभग तीन किलोमीटर जमीन की पैमाइश का काम नहीं करवा रहा। ग्रामीण इसके लिए भी विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन बार-बार टाल-मटोल की जा रही हैं। इस मामले में पीडब्ल्यूडी बीएंडआर की तरफ से तहसीलदार को पैमाइश के लिए पत्र लिखा गया है।
04jjrp07- सेहलंगा गांव की जमीन जिसका अधिग्रहण किया गया। यहां अब मकान भी बन चुके हैं। स्रोत-ग्र- फोटो : samvad