बहादुरगढ़। आज के डिजिटल युग में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है बल्कि कौशल, आत्मविश्वास एवं वैश्विक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। यह बात गिजेल अलानिज सीएसएएम पार्टनर माइक्रोसॉफ्ट और गिगी मोटिवेशन की फाउंडर अमेरिका ने कही।
वह शुक्रवार को वैश्य आर्य शिक्षण महिला महाविद्यालय द्वारा सीखने से कमाई तक डिजिटल सशक्तिकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता तत्परता के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के लिए एनईपी 2020 के तहत उच्च शिक्षा की नई परिकल्पना विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल बहुविषयक संगोष्ठी में अपनी बात रख रहीं थीं।
संगोष्ठी ईक्वल ऐक्सेस अमेरिका स्थित एक प्रतिष्ठित गैर-लाभकारी संस्था के सहयोग से संपन्न हुई। कार्यक्रम में भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों से शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं विशेषज्ञों ने सहभागिता दर्ज कराई। इसमें डिजिटल सशक्तिकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फ्रीलांसिंग इकोसिस्टम, नवाचार, उद्यमिता एवं आत्मनिर्भर भारत विषयों पर चर्चा हुई।
वहीं अनघा तोदलबागी, प्रोडक्ट मैनेजर, माइक्रोसॉफ्ट, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. रमेश चंद्र शर्मा निदेशक, मानव संसाधन विकास केंद्र, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला।
डॉ. नसीब सिंह गिल वरिष्ठ प्रोफेसर एवं अधिष्ठाता गणितीय एवं संगणकीय विज्ञान संकाय महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय ने डिजिटल युग में तकनीकी दक्षता के महत्व को रेखांकित किया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा ने कहा यह संगोष्ठी सीखने से कमाने की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस मौके पर डॉ. तरूणा मल्होत्रा, डॉ. महाश्वेता, डॉ. सुनीता आर्य, डॉ. मंजू गहलावत हुड्डा, डॉ. गीता रानी, तथा डॉ. निधि कक्कड़, श्रीनिवास गुप्ता, सत्यनारायण अग्रवाल समेत अन्य मौजूद रहे।