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नागरिक अस्पताल में भटकते रहे मरीज

Sat, 13 Feb 2016 02:03 AM IST
झज्जर/बहादुरगढ़
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बसंत पंचमी के दिन सिविल अस्पताल की ओपीडी पर ताला लटका देखकर कई मरीजों को बिना इलाज बैरंग लौटना पड़ा। बच्चों से लेकर बड़ों तक परेशान दिखे।
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सबसे ज्यादा दिक्कतें बच्चों के इलाज को लेकर हुई। यहां पर कोई भी डाक्टर मौजूद न होने से अभिभावकों को निजी अस्पतालों की ओर जाना पड़ा।

हर रोज की तरह शुक्रवार को भी दिनभर लोग इलाज के लिए नागरिक अस्पताल में आते दिखे, लेकिन अवकाश के चलते ओपीडी परिसर सुनसान दिखाई दिया।

ओपीडी की तरफ जाने वाले गेट पर ताला लटका देखकर उन्हें या तो बैरंग घर लौटना पड़ा या फिर ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टर से परामर्श लेते हुए दवाइयों के लिए भी भटकना पड़ा। क्योंकि ट्रॉमा सेंटर में पर्याप्त दवा उपलब्ध न होने से मरीजों को बाहर से लानी पड़ी।

सुबह से ही मरीजों की भीड़ ओपीडी परिसर की तरफ जाती दिखी। मगर यहां अवकाश से संबंधित ओपीडी सेवाएं बंद होने को लेकर कोई सूचना नहीं लगी होने से कई मरीजों को बिना इलाज घर लौटना पड़ा तो कुछ को ट्रॉमा सेंटर में आधी-अधूरी चिकित्सा सेवाएं मिलने से मायूस भी दिखे।
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रोहद से आई अंजलि, वंदना, प्रमिला, इंदिरा मार्केट की बिंदु, नांगलोई निवासी संतोष, दयानंद नगर निवासी अनिल व टीकरी बॉर्डर निवासी गीता ने बताया कि उन्हें अवकाश को लेकर ओपीडी सेवा बंद रहने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले में कोई पूर्व सूचना तक भी नहीं दी। यहां तक कि कोई नोटिस बोर्ड पर भी सूचना अंकित नहीं की हुई थी। अस्पताल में आए अनिल ने बताया कि उसके बच्चे की तबीयत खराब थी।

ऐसे में वह यहां बेहतर इलाज की सोच कर आया था, लेकिन यहां उन्हें बच्चों के डॉक्टर की सेवा ही नहीं मिल पाई। ऐसे में उसे परेशान होकर प्राइवेट अस्पताल में जाकर बच्चे का इलाज करवाना पड़ा।
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नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अक्सर किसी न किसी अवकाश पर उन्हें इस तरह की दिक्कतों का सामना करना ही पड़ता है।

कई बार हॉस्पिटल मैनेजमेंट के समक्ष लोगों ने आवाज भी उठाई है कि जब भी ओपीडी सेवाएं बंद रहे, इसको लेकर दो-तीन दिन पहले आम जन को सूचना जरूर देनी चाहिए, ताकि लोग पढ़कर या सुनकर बेवजह परेशान होने से तो बच सके।
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