किसानों के ऊपर छाया आपदाओं का साया थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले मौसम के कारण और अब नहर टूटने के कारण होने वाले फसली नुकसान से किसान काफी परेशानी हैं। इसके लिए अब किसान सरकार की तरफ मुआवजे के लिए बाट जोह रहे हैं। इसके लिए नहरी विभाग के अधिकारियों को दोषी माना जा रहा है। आल इंडिया कृषक खेत मजदूर संगठन के प्रदेशाध्यक्ष अनूप मातनहेल व प्रदेश सहसचिव जयकरण मांडौठी ने कहा कि शनिवार को जवाहर लाल नेहरू कनाल के टूटने से मातनहेल गांव की करीब 600 एकड़ फसल जलमग्न हो गई। पककर तैयार खड़ी फसल के साथ ही किसानों की अरमान भी जुड़े हुए थे।
जिनके अरमानों में पानी फेरने के नहरी विभाग की अधिकारी ही सबसे बड़े दोषी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि वक्त रहते अधिकारी इसकी सुध ले लेते तो किसानों की फसल बर्बाद नहीं होती। उन्होंने कहा कि किसान पर समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। जिसके लिए खेती महज घाटे का ही सौदा साबित होती जा रही है। किसान नेताओं ने कहा कि टूटी हुई कैनाल को तुरंत प्रभाव से दुरुस्त कराते हुए जल निकासी की व्यवस्था की जाए। इसके साथ-साथ किसानों को 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाना चाहिए।
गांव अच्छेज में भी आई पटरी में दरार
अच्छेज के ग्रमीणों ने बताया कि शनिवार को विभाग द्वारा जेएलएन नहर की छटाई करवाई जा रही थी। जिसके चलते नहर की पटरी में दरार आने के कारण वह एक तरफ ढह गई है। मशीन सफाई करते हुए आगे निकल गई और उन्हें इस दरार के बारे में कुछ पता नहीं चला। अगर भविष्य में नहर में ज्यादा पानी छोड़ा जाता है तो उक्त स्थान से ढही हुई पटरी टूटने का खतरा है।