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संसाधनों और स्टाफ की कमी बढ़ा रही चिंता

Mon, 04 Apr 2016 01:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/झज्जर/बहादुरगढ़
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दमकल - फोटो : Bureau
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फसली सीजन शुरू हो गया है। इस सीजन में आगजनी की घटनाएं बढ़ने का अंदेशा लगातार बना रहता है। फायर ब्रिगेड ने आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए अपने स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, लेकिन संसाधनों व स्टाफ की कमी ने कर्मचारियों व अधिकारियों की चिंता भी बढ़ा दी है। हर तरह की घटनाओं पर कंट्रोल करने के लिए कर्मचारियों की छुट्टियां तक कैंसिल कर दी गई हैं। उन्हें केवल साप्ताहिक अवकाश की ही मोहलत दी गई है। गत वर्ष में साल भर में लगभग 400 फायर काल हुई थी। आग की घटनाओं पर तुरंत काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड ने अपनी व्यवस्था दुरुस्त कर ली है। गाड़ियों की सर्विस तक करा ली गई है।
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दो फायर स्टेशनों से फिलहाल 5 गाड़ियों की मदद से आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए कर्मचारियों को दिक्कतें झेलनी पड़ती है। औद्योगिक नगर बहादुरगढ़ में दो फायर स्टेशन बनाए हुए हैं। एक इंद्रा मार्केट में है तो दूसरा एमआईई पार्ट वन में खुला है। दोनों स्टेशनों के लिए कुल पांच गाड़ियां आगजनी की घटनाओं पर काबू पाने के लिए खड़ी रहती है, लेकिन शहरी व ग्रामीण क्षेत्र का दायरा अधिक होने के कारण कई बार ये गाड़ियां कम पड़ जाती है। ऐसे में दूसरे जिलों व दिल्ली से भी संपर्क साधकर गाड़ियां बुलानी पड़ती है।

तीन शिफ्ट में फायरमैन अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। इंद्रा मार्केट के ऑफिस में जहां एक वाटर ब्राउजर, एक फोम टैडर, एक वाटर टैडर तो एक वाटर मिष्ट की सुविधा उपलब्ध है, जबकि एमआईई में एक गाड़ी हर वक्त मौजूद रहती है, लेकिन गाड़ियों की कमी यहां पर खूब खल रही है।
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-6 गाडिय़ां कंडम
फायर सर्विस स्टेशन पर कुल मिलाकर 11 गाडिय़ां है जिनमें से 6 गाडिय़ों को तो कंडम घोषित किया जा चुका है। जो गाडिय़ां कंडम है वे दस वर्ष से अधिक पुरानी है। यही नहीं उनकी हालत में खस्ता है। ऐसे में आबादी व क्षेत्र के हिसाब से 5 गाडिय़ों के सहारे ही बहादुरगढ़ में आगजनी की घटनाओं पर काबू पाने के लिए स्टाफ दिन-रात ड्यूटी बजा रहा है।


-90 में से 31 का स्टाफ
फिलहाल यहां पर 31 का स्टाफ कार्यरत है। इसमें फायर आफिसर, लीड फायरमैन, फायरमैन, ड्राइवर भी शामिल हैं। लेकिन जितनी यहां पर गाडिय़ां है उनके लिए कम से कम 90 का स्टाफ चाहिए। क्योंकि प्रत्येक गाड़ी पर कम से कम 6 सदस्य होते है ऐसे में तीन शिफ्टों के लिए 90 कर्मचारी तो हर हाल में चाहिए। लेकिन लंबे अर्से से स्टाफ क कमी यहां खूब खल रही है। इसको दूर करने के लिए कोई सार्थक कदम तक नहीं उठ रहे।


-रेस्क्यू गाड़ी में सामान की कमी
यहां पर एक बड़ी रेस्क्यू गाड़ी की सुविधा थी लेकिन अब वह कंडम हो गई। वाटर मिस्ट के सहारे ही रेस्कयू कॉल अटेंड की जा रही है। इस गाड़ी में फायर मैनों को सामान की कमी जरूरत के हिसाब से खूब खलती है। रेस्कयू आप्रेशन सैल के पास न तो फायर सूट है और न ही कटर, बोट व अन्य सामान। वाटर मिस्ट में केवल एक रस्सी है व छोटा-मोटा सामान उसके सहारे ही काम चलाया जा रहा है। लेकिन यह रस्सी भी अब लंबी चलने वाली नहीं दिख रही।


-जाम में फंसती गाडिय़ां
आगजनी की घटनाओं पर तुरंत काबू पाने के लिए गाडिय़ां तो सर्विस सेंटर से तुरंत सड़कों पर दौड़ पड़ती है लेकिन शहर के बीचोंबीच चल रहे मेट्रो वर्क व सड़कों पर फैले अतिक्रमण के चलते गाडिय़ां कई बार जाम में फंस जाती है। ऐसे में काफी समय इस जाम में ही कर्मचारियों का खराब हो जाता है। ट्रैफिक व्यवस्था बदहाल होने से दिक्कतें तक आन खड़ी होती है।


-तैयारियां पूरी
फायर ब्रिगेड की ओर से पूरी तैयारियां की हुई है। कर्मचारियों की छुट्टियां रद कर दी गई है। उनकी 12-12 घंटे की ड्यूटी लगाई गई है। स्टाफ व गाडिय़ों की कमी है। उच्च अधिकारियों को इस मामले में पत्र लिखकर अवगत भी कराया जा चुका है। बेरी मेले को लेकर भी पूरी व्यवस्था है। यहां पर पांच गाडिय़ां एहतियात तौर पर रहेंगी। इसके लिए दो बहादुरगढ़, दो झज्जर तो एक रोहतक से व्यवस्था की गई है।
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-राजेंद्र सिंह दहिया, फायर आफिसर, बहादुरगढ़।
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