आयुष्मान भारत योजना के तहत जागरूकता के अभाव में लोग गोल्डन हेल्थ कार्ड बनवाने में रुचि नहीं दिखा रहे। एक लाख 78 हजार लाभार्थी सूची वाले झज्जर जिले में अभी तक केवल 51 हजार लोगों ने ही हेल्थ कार्ड बनवाएं हैं। ऐसे में साफ है कि 30 फीसदी लोग ही अभी तक योजना का लाभ उठाने में सक्षम हुए हैं। करीब चार हजार लोग ऐसे हैं, जो गोल्डन कार्ड से निशुल्क इलाज का फायदा उठा चुके हैैं। ऐसे लोगों को गोल्डन कार्ड की अहमियत का पता है। वहीं शुरू के छह माह में करीब 32 हजार लोगों ने कार्ड बनवाए। लेकिन उसके बाद के छह महीने में मात्र 19 हजार लाभार्थियों ने ही कार्ड बनवाए। विभाग द्वारा 26 जनवरी तक टारगेट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन एक साल बाद भी कार्ड बनने की गति काफी धीमी है।
प्रचार के बावजूद आगे नहीं आ रहे लोग
आयुष्मान भारत योजना के लिए बनने वाले कार्ड की जानकारी हर सीएचसी व पैनल वालों अस्पताल में उपलब्ध है। वहीं ग्राम स्तर पर आशा वर्कर लाभपात्रों के घर-घर जाकर कार्ड बनवाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं लेकिन लोग कार्ड बनवाने के लिए आगे नहीं आ रहे। इसके अलावा अब गांवों में सरपंचों के माध्यम से मुनादी भी करवाई जाएगी।
यहां बनवा सकते हैं हेल्थ कार्ड
आयुष्मान भारत योजना के लाभपात्रों की सूची में अगर आपका नाम है तो किसी भी राजकीय अस्पताल या पैनल वाले अस्पताल में जाकर कार्ड बनवाया जा सकता है। यहां पर आपको निशुल्क कार्ड उपलब्ध करवाया जाएगा। वहीं गांव के कॉमन सर्विस सेंटर पर भी कार्ड बन सकता है लेकिन यहां पर 30 रुपये की फीस देनी होगी।
इन अस्पतालों में करवा सकते हैं इलाज
झज्जर, बहादुरगढ़ व बेरी के राजकीय अस्पताल के अलावा झज्जर के ऑस्कर अस्पताल, एडवांटा अस्पताल, वर्ल्ड मेडिकल कॉलेज गिरावड़, आईक्यू अस्पताल शामिल हैं। वहीं बहादुरगढ़ के आरजे अस्पताल, स्वास्तिक हॉस्पिटल, शिवम हॉस्पिटल, ब्रह्मशक्ति हॉस्पिटल, दिल्ली अस्पताल, सेवन मिड प्राईवेट लिमिटेड अस्पताल, डा. संजय अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के पैनल पर हैं
कार्ड बनवाने का टारगेट काफी पीछे चल रहा है। जागरूकता के बावजूद लोग कार्ड बनवाने के लिए नहीं आ रहे। कार्ड बनवाने के लिए बीमार पड़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए। अगर आप अस्पताल में भर्ती हो गए तो वहां कार्ड बनना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि मरीज का बायोमीट्रिक दर्ज होता है। वहीं कुछ लोग परिवार में पांच लोगों का नाम हो तो केवल मुखिया का ही बनवा रहे हैं, जबकि सभी सदस्यों का कार्ड बनवाना चाहिए।
डॉ. मनोज, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना।