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ओमैक्स निदेशकों के खिलाफ चलेगा धोखाधड़ी का केस

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बहादुरगढ़। ओमैक्स प्रबंधकों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाले शहर के मॉडल टाउन निवासी प्रमोद गुप्ता के केस में जिला सत्र न्यायालय ने ओमैक्स लिमिटेड के निदेशकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर निचली अदालत को सम्मन करके ट्रायल चलाने का आदेश जारी किया है। सत्र न्यायालय ने बहादुरगढ़ न्यायालय द्वारा प्रमोद गुप्ता द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर रद्द करने के लिए दिए फैसले को निरस्त कर दिया है।
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प्रेसवार्ता में प्रमोद गुप्ता ने बताया कि ओमैक्स लिमिटेड के निदेशक रोहतास गोयल, सुनील गोयल, जयभगवान गोयल, संदीप मंगला व अन्य पर 17 दिसंबर 2014 को भारतीय दंड संहिता धारा 406, 420, 467, 468, 471 व 120 के तहत दर्ज एफआईआर नंबर 495 को सत्र न्यायालय ने सही ठहराया और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। यह एफआईआर बंसल पोल्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोद गुप्ता द्वारा कराई गई थी। गुप्ता का कहना है कि ओमैक्स प्रबंधन ने धोखाधड़ी करने के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पर उन्हें कई बार डराया व धमकाया गया।
इस तरह की धोखाधड़ी
प्रमोद गुप्ता ने कहा कि बहादुरगढ़ में ओमैक्स ने कई बड़े टावर और फ्लैट बनाए हैं। कई उपभोक्ताओं के साथ फ्लैट देने के नाम पर धोखा किया गया। ऐसा ही धोखा उनके साथ भी हुआ। गुप्ता ने बताया कि उन्होंने बहादुरगढ़ ओमैक्स सिटी के सेल्सिया व अन्य टावर में साल 2007 में फ्लैट बुक करवाया था। इसके लिए उन्होंने 23 अप्रैल 2008 तक 6 लाख 30 हजार रुपये की दो किश्तें भी जमा करा दी थी। यह फ्लैट उन्हें 18 महीने में मिलना था, मगर टावर का निर्माण शुरू नहीं हुआ। बार-बार पता करने पर दो साल बाद ओमैक्स प्रबंधन ने 2010 में उन्हें बताया कि सेल्सिया व अन्य टावर बनाने की उनके पास अनुमति नहीं है इसलिए उन्हें दूसरी जगह ग्राउंड फ्लोर पर तीन बेडरूम का 106 नंबर फ्लैट अलॉट किया गया है। इसके नाम पर भी गुप्ता ने 2 लाख 90 हजार 623 रुपये की एक और किश्त जमा करा दी। 28 मई 2012 को गुप्ता ने ओमैक्स के साथ बिल्डर एंड बायर एग्रीमेंट साइन किया, जिसके बाद उन्हें पता चला कि जिस जगह उन्हें 106 नंबर फ्लैट अलॉट किया है वहां तो 9 मई 2012 को ही दुकानें बनाकर बेच दी गई हैं।
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साढ़े तीन करोड़ की ठगी का आरोप
गुप्ता ने बताया कि शुरुआत में बंसल पोल्स ने 18 फ्लैट बुक कराए थे। इनमें से ओमैक्स ने जान बूझकर 9 फ्लैट रद्द कर दिए और उन्हें केवल 9 फ्लैट अलॉट किए। अलॉट किए गए 9 फ्लैट में से एक फ्लैट की जगह पर धोखाधड़ी से दुकान बनाकर ओमैक्स ने बेच दी। पूरा भुगतान करने के बाद भी आज तक प्रबंधन ने उनके 8 फ्लैटों की जान बूझकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए और पैसों व प्रॉपर्टी का गबन करने के लिए रजिस्ट्री नहीं करवाई। गुप्ता ने बताया कि इस तरह ओमैक्स ने उनके साथ लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये की ठगी की है। इस पूरे मामले की शिकायत उन्होंने हर जगह की, पर न्याय नहीं मिला। उल्टा सरकार में बैठे लोगों व जांच अधिकारी ने राजीनामा करने के लिए दबाव बनाया। मगर उन्होंने हार नहीं मानी। प्रेसवार्ता के दौरान एडवोकेट अजय शर्मा भी मौजूद रहे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति लांबा की कोर्ट के आदेश से मुझे न्याय मिलने की आस जगी है। न्यायालय के आदेश पर धोखाधड़ी के आरोपियों पर मुकदमा चलेगा। अगर अन्य लोग भी इस तरह की धोखाधड़ी के शिकार हैं तो हताश होने और हार मानने के बजाय न्यायपालिका में विश्वास रखते हुए अपनी आवाज को बुलंद करें। आखिरी में जीत सत्य की ही होगी।
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- प्रमोद गुप्ता, एमडी, बंसल पोल्स प्राइवेट लिमिटेड।
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