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बढ़ते तापमान से बढ़ी किसानों चिंता, गेहूं व सब्जियों पर पड़ सकता है असर

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झज्जर। जिलेभर में एक सप्ताह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। बढ़ते तापमान से रबी की फसलों पर विपरीत असर पड़ने लगा है। वहीं गेहूं की फसल पर ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। खेतों की नमी में लगातार कमी आने से पानी बार-बार देना पड़ रहा है। सब्जियों को भी ज्यादा नुकसान हो सकता है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती है। जिले में करीब एक लाख हेक्टेयर भूमि गेहूं और करीब पांच हजार हेक्टेयर भूमि पर सब्जियों की खेती की जाती है।
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तापमान में बढ़ोतरी से हरी प्याज (आल) की फसल में कीट लगने के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। कीटनाशक के छिड़काव का भी खर्चा बढ़ गया है। वहीं पछेती मूली, गाजर, मेथी, पालक व अन्य सब्जियों में नुकसान दर्ज किया जा रहा है। इस बार मध्य मार्च के बाद ही तापमान में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। दोपहर में गर्म हवाएं चल रही हैं। सूरज से तीखे तेवर से भी लोगों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। रविवार को अधिकतम तापमान सुबह से ही 37 डिग्री था। दोपहर को तो तापमान 39 डिग्री तक पहुंच गया था। सुबह-शाम की हल्की ठंड और दोपहर को भीषण गर्मी ने फसल प्रबंधन का गणित बिगाड़ दिया है। इन दिनों कीट पत्तियों, फूलों व कलियों से रस चूसते हैं। जिससे पत्तियां पीली पड़कर सूख जाती हैं। इससे फलियों में बीज पूरी तरह नहीं बन पाते हैं। इससे पैदावार पर विपरीत असर पड़ रहा है।
- तापमान बढ़ने पर किसानों की प्रतिक्रिया :
तापमान बढ़ने से गेहूं और सब्जियों को काफी नुकसान होने का अंदेशा है। इस बार फसल में ज्यादा कीट लग रहे हैं। कीटनाशकों का छिड़काव करने में काफी खर्चा हो जाता है। मौसम के प्रभाव से किसान को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए समय से पहले पानी देना पड़ रहा है। - किसान बब्बू सैनी, झज्जर।
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तापमान बढ़ने से गेहूूं की फसल पीली दिखाई देने लगी है। अचानक बढ़ी गर्मी ने रिकार्ड तोड़ दिए है। गेहूं, पछेती सरसों और सब्जियों में कीटों का प्रभाव एकाएक बढ़ने से चिंता बढ़ने लगी है। हालांकि गेहूं पकाई पर आने में अभी थोड़ा और समय लगता, लेकिन तापमान बढ़ने का असर साफ दिखाई देने लगा है। - किसान धर्मेंद्र, झज्जर।
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प्याज, मेथी, पालक और अन्य सब्जियों पर तापमान बढ़ने का असर दिखाई देने लगा है। प्याज की फसल एकदम से सूखने लगी है। काफी नुकसान हो गया है। इससे आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। - विनोद कुमार, किसान, झज्जर।
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इंसेट
फसल बचाने यह करें किसान
कृषि विभाग के असिस्टेंट प्लांट प्रोडक्शन ऑफिसर फूल कुमार हुड्डा ने बताया कि बढ़ते तापमान का सबसे अधिक असर गेहूं की फसल पर हो रहा है। पीला रतुआ और काला अल फसल में लग जाता है, जोकि दाने का रस चूस लेता है। ऐसी स्थिति में गेहूं की फसल में सिंचाई ज्यादा और कम वक्त के अंतर से करें। इससे गर्मी का असर कम किया जा सकता है। इसके अलावा गर्मी के कारण फसलों में कीट का प्रकोप बढ़ गया है। कीटों से फसल को बचाने के लिए सरसों, गेहूं सहित अन्य फसलों पर मैलाथिमान चार सौ मिली लीटर प्रति एकड़ दो सौ लीटर पानी में मिलाकर किसान स्प्रे करें।
वर्जन
तापमान बढ़ने से फसल को नुकसान हो सकता है, फिलहाल फसल पकाई पर आ चुकी है। दाना भी पक रहा है। पछेती गेहूं की फसल को नुकसान होने की आशंका है। किसानों को खेतों में नमी बनाए रखनी चाहिए। मौसम में अचानक हुए बदलाव से हैरान हैं। - इंद्र सिंह, कृषि उप निदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, झज्जर।
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इंसेट
तापमान पर एक नजर
दिन अधिकतम न्यूनतम
13 मार्च 30.0 18.0
14 मार्च 34.0 20.0
15 मार्च 35.0 21.0
16 मार्च 36.0 21.0
17 मार्च 36.0 22.0
18 मार्च 35.0 22.0
19 मार्च 36.0 21.0
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