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सारी मांगे पूरी न होने तक टीकरी बॉर्डर से नहीं हटेंगे किसान

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टीकरी बार्डर पर पीएम की घोषणा पर चर्चा करते दलाल खाप के किसान। - फोटो : Bahadurgarh
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बहादुरगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा से आंदोलनकारी किसानों के टीकरी बार्डर पड़ाव में कुछ विशेष प्रतिक्रिया नहीं हुआ। अपेक्षा थी कि प्रधानमंत्री कानून वापसी की घोषणा कर दें तो किसान जमकर खुशी मनाएंगे और हो सकता है अपने घर लौटने के फैसला भी ले लें। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बार्डर पर स्थिति लगभग सामान्य रही। किसानों ने पीएम की घोषणा से खुशी तो जताई, लेकिन साथ ही कहा कि सभी मांगें पूरी होने से पहले आंदोलन खत्म नहीं होगा।
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किसान आंदोलनकारियों के टीकरी बार्डर पड़ाव में शुक्रवार को किसान खुश तो नजर आए, लेकिन सामान्य रहे। गुरुनानक जयंती के श्रद्धा भाव सभी जगह जरूर नजर आ रहे थे। कई जगह प्रसाद बांटा गया। शब्द कीर्तन हुआ। किसान हुक्कों पर चर्चा करते नजर आए। इतनी बड़ी खबर सुनकर भी बार्डर से दो-दो फुट के आने-जाने वाले रास्ते से पुलिस सुरक्षा में आवागमन सामान्य रहा।
पीएम मोदी की घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा की टीकरी बार्डर कमेटी के सदस्यों ने कहा कि यह खुशी की बात है। लेकिन इस सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता। जब तक संसद में कानून वापसी का प्रस्ताव पास होकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर नहीं होंगे, तब कानून वापसी की बात नहीं मानी जा सकती। उन्होंने कहा कि किसान की सभी उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी वाला कानून, बिजली बिल-2021 वापस होने, पराली कानून के रद्द होने, किसान आंदोलन में किसानों के खिलाफ दर्ज हुए सभी केस वापस लेने, पीड़ित किसान परिवारों को मुआवजा देने और इन परिवारों के एक-एक सदस्य को स्थायी सरकारी नौकरी देने की मांग पूरी होने तक आंदोलन वापस नहीं होगा।
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एसकेएम तय करेगा रणनीति
पंजाब किसान यूनियन के नेता रुलदू सिंह मानसा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीनों कानूनों को वापस लेने के ऐलान पर किसानों को बधाई दी। लेकिन देरी से उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि स्विस बैंकों से काला धन लाकर देश के हरेक परिवार के खाते में 15 लाख रुपये डालने का वादा करने करने वाले प्रधानमंत्री की बात पर अभी यकीन नहीं किया जा सकता। हम 500 किसान 29 नवंबर को पार्लियामेंट के लिए दिल्ली कूच अवश्य करेंगे। इससे पहले एसकेएम की मीटिंग में भविष्य की रणनीति तय होगी। उन्होंने कहा कि जैसे गुरुनानक देव ने खेती बचाने के लिए जोर लगाय था, वैसे ही हमने भी अपनी खेती बचाने के लिए बहुत जोर लगाया।
26 व 29 के कार्यक्रम यथावत
जम्हूरी किसान सभा के अमरीक सिंह भाई के फबड़े ने कहा कि मोदी की घोषणा से किसानों की जीत हुई है। खुशी की बात है कि मोदी ने यह ऐलान गुरु नानक जयंती पर किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। अब हम एमएसपी पर कानून बनवाएंगे। 26 नवंबर को टीकरी बार्डर पर इकट्ठे होंगे और 29 नंबर को 500 किसान दिल्ली जाएंगे।
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