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केएमपी पर किसानों ने पांच घंटे किया चक्का जाम

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केएमपी पर ट्राली में खड़े होकर किसानों के संबोधित करते किसान। - फोटो : Bahadurgarh
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बहादुरगढ़। तीन कृषि कानूनों को रद्द करने और कानून बनाकर एमएसपी की गारंटी देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने शनिवार को नेशनल हाईवे-9 और बादली के पास केएमपी पर करीब पांच घंटे तक चक्का जाम किया। इस दौरान काफी संख्या में वाहन जाम में फंसे रहे। जाम की वजह से खासतौर पर ट्रक आदि बड़े वाहनों को भारी कठिनाई हुई।
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संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आंदोलनकारियों के टीकरी बॉर्डर पड़ाव से और आसपास के मांडोठी, आसौदा व अन्य गांवों से सुबह साढ़े दस बजे से पहले ही किसान कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे पर पहुंचने शुरू हो गए। सवा 11 बजेे तक किसानों की भीड़ सैकड़ों में हो गई और ठीक 11 बजे किसानों ने आसौदा मोड़ के निकट केएमपी पर जाम लगा दिया। काफी संख्या में किसान सड़क पर बिछाई दरियों पर बैठ गए। कुछ ही देर में केएमपी पर वाहनों की लाइन लग गई। इनमें ट्रकों की संख्या अधिक थी। कार आदि छोटे वाहनों की संख्या कम ही रही। अधिकतर छोटे वाहन वापस मुड़कर कम ऊंचाई वाले स्थान से खेतों के रास्ते निकल गए। लेकिन ट्रक आदि वाहन मुड़ नहीं पाए और पांच घंटे तक जाम में फंसे रहे, लगभग 4 बजे किसानों ने रास्ता खोला।
जाम में फंसे वाहनों के चालकों, परिचालकों और दूसरे यात्रियों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। इन राहगीरों और चक्का जाम करवाने आए किसानों के लिए आंदोलनकारियों ने केएमपी पर ही चाय-पानी का इंतजाम किया था। मांडोठी-आसौदा टोल प्लाजा के निकट भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के नेता जोगेंद्र सिंह उगराहां ने किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आम आदमी को परेशान करना उनकी मकसद नहीं है, लेकिन इंसाफ हासिल करने के लिए किसानों की एकता और ताकत का प्रदर्शन करना बहुत जरूरी है। हरियाणा की कुछ किसान महिलाओं ने काली चुन्नी ओढ़कर और काले झंडे लेकर प्रदर्शन किया। चक्का जाम लगभग 11 से 4 बजे तक रहा। बादली के पास भी किसानों ने केएमपी पर चक्का जाम किया।
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ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के नेता और कार्यकर्ता भी चक्का जाम प्रोग्राम में शामिल थे। संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण मांडोठी ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक तीनों कानून रद्द नहीं किए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। तीन किसान कानून व बिजली बिल 2020 के खिलाफ और एमएसपी को कानूनी दर्जा दिलाने के लिए आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा। बीजेपी सरकार ने आंदोलन फेल करने के लिए व किसानों के हौसले पस्त करने के लिए हर हथकंडा अपनाया। लेकिन किसान मजदूरों की जागरूकता व एकजुटता के कारण सरकार अपने प्रयास में सफल नहीं हो पाई। इस आंदोलन की बागडोर किसी एक नेता के हाथ में न होकर धरनारत किसानों के हाथ में है, इसलिए किसान नेताओं में भी सरकार फूट नहीं डाल पाई। चक्का जाम करने वालों में महावीर सिंह, बलजीत, दिलीप सिंह, धीरे, रण सिंह, भारत, गोविंद, रणबीर सिंह, दिलबाग सिंह दलाल व रामकिशन समेत सैकड़ों किसान शामिल थे।
जयकरण ने कहा कि आंदोलन की जीत हमारी जिंदगी है और इस आंदोलन की हार हमारी मौत। ये काले कानून केवल किसानों के खिलाफ ही नहीं है बल्कि भूमिहीन शहरी गरीबों के साथ ग्रामीण गरीबों, खेत मजदूरों और दस्तकारों को भी बर्बाद कर देंगे। अडानी-अंबानी आदि को जमाखोरी की छूट देने से खाद्य पदार्थ प्याज की तरह कई गुणा अधिक रेट पर मिलेंगे। प्राइवेट मंडियों के कारण सरकारी मंडिया बंद हो जाएंगी तो सरकारी खरीद भी नहीं रहेगी और एमएसपी भी नहीं मिलेगा।
किसान नेताओं ने कहा कि नए कानूनों से देश के गरीबों के लिए राशन प्रणाली खत्म हो जाएगी। बिजली गरीब नागरिकों की पहुंच से बाहर हो जाएगी। रेलवे आदि सरकारी क्षेत्र के निजीकरण के कारण सरकारी नौकरी भी खत्म हो चुकी हैं। खेती में लागत लगातार बढ़ती जा रही है और वादे करके भी सरकार ने किसानों को लागत से डेढ़ गुना दाम नहीं दिया। बढ़ते कर्ज के कारण किसानों की आत्महत्याओं की दर भी कम नहीं हुई है। डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस व यात्री रेल गाडिय़ों का किराया बढने से महंगाई आकाश छू रही है, गरीब का जीना दूभर हो चुका है। ऐसे हालात में आंदोलन के अलावा मुक्ति का और कोई रास्ता नहीं है।

काली चुन्नी ओढ़कर आई महिलाओं ने काले झंडे लेकर किया प्रदर्शन।- फोटो : Bahadurgarh

केएमपी पर आसौदा मोड़ के निकट जाम में ट्रक।- फोटो : Bahadurgarh

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