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उम्मीद: झज्जर में जल्द शुरू होगा सैनिक स्कूल का निर्माण, भूमि संबंधित आपत्तियां की दूर

Thu, 08 Jul 2021 12:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झज्जर (हरियाणा)

सार

2003 में तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस व प्रदेश के मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने सैनिक स्कूल के निर्माण के लिए आधारशिला रखी थी। उसके बाद इस स्कूल को तब्दील कर रेवाड़ी जिले के पाली गोठड़ा में बना दिया गया था।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झज्जर के मातनहेल गांव में सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए कार्रवाई तेजी से शुरू हो गई है। उपायुक्त कार्यालय के माध्यम से भेजे गए प्रस्ताव पर राज्य सैनिक बोर्ड की तरफ से आपत्ति लगाकर वापस भेज दिया गया है। इसमें सैनिक स्कूल के नाम से पहले दी गई जमीन का प्रस्ताव रद्द होगा। उसके बाद नई जमीन पर स्कूल बनाने के आदेश जारी किए जाएंगे। इसके लिए प्रशासन की तरफ से ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव पारित करवाने के बाद खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी की तरफ से गुरुवार को मुख्यालयों को भेजे जा रहे हैं। मुख्यालय की तरफ से जताई आपत्तियों को दूर कर दिया गया है।
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उपायुक्त कार्यालय से मुख्यालय को भेजा गया था पत्र
मार्च में झज्जर के उपायुक्त ने महानिदेशक विकास एवं पंचायत विभाग हरियाणा को पत्र भेजा था। इसके बाद सैनिक स्कूल के निर्माण की उम्मीदें बढ़ गई थीं। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी मातनहेल की तरफ से उपायुक्त को भेजे गए पत्र में कहा गया था कि मातनहेल व रूड़ियावास की ग्राम पंचायत की तरफ से पारित प्रस्ताव के अनुसार ग्राम पंचायत मातनहेल व ग्राम पंचायत रूड़ियावास की तरफ से 301 एकड़ सामूहिक जमीन उपहार स्वरूप सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए दी गई थी। परंतु इस जमीन पर सेक्शन चार व पांच लगने के कारण सैनिक स्कूल का भवन निर्माण उचित नहीं है।


301 एकड़ जमीन जो पहले सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए उपहार स्वरूप जिला सैनिक बोर्ड को दी गई थी उसमें 259 एकड़ भूमि मातनहेल व 42 एकड़ भूमि ग्राम पंचायत रूड़ियावास की है। दोनों ग्राम पंचायतें अपने प्रस्ताव के अनुसार इसे वापस लेना चाहती हैं। जबकि ग्राम पंचायत मातनहेल की तरफ से सैनिक स्कूल के निर्माण के लिए 61 एकड़ भूमि अलग से दी गई है। जिस पर सैनिक स्कूल जनहित में स्थापित किया जा सकता है। उपायुक्त की तरफ से 4 मार्च को यह पत्र महानिदेशक विकास एवं पंचायत विभाग हरियाणा को भेज दिया था। इसके अनुसार अब पहली जमीन का प्रस्ताव रद्द किया जाएगा और नई जमीन पर सैनिक स्कूल बनाने के लिए आदेश जारी किए जाएंगे।
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स्कूल निर्माण के लिए इस तरह चली प्रक्रिया

सैनिक स्कूल निर्माण समिति के पदाधिकारी गुरदीप सुहाग ने बताया कि 30 जनवरी 1983 को मातनहेल के तत्कालीन सरपंच दलेल सिंह ने जिला सैनिक बोर्ड को प्रस्ताव भेजा था। उसके बाद 17 सितंबर 1987 को तत्कालीन सरपंच महा सिंह की तरफ से भी प्रस्ताव भेजा गया था। जबकि वर्ष 2002 में तत्कालीन सरपंच बादामो देवी की तरफ से तीसरी बार प्रस्ताव पारित कर करीब 259 एकड़ भूमि व रूड़ियावास के तत्कालीन सरपंच उमेद सिंह की तरफ से 42 एकड़ भूमि का प्रस्ताव पारित करवाकर जिला सैनिक बोर्ड को दिया था। जिसका इंतकाल भी सैनिक स्कूल के नाम 2002 में हो गया था।

2003 में रक्षामंत्री ने रखी थी आधारशिला
वर्ष 2003 में तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस व प्रदेश के मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने सैनिक स्कूल के निर्माण के लिए आधारशिला रखी थी। उसके बाद इस स्कूल को तब्दील कर रेवाड़ी जिले के पाली गोठड़ा में बना दिया गया था। एक बार फिर से भाजपा सरकार आने के बाद इस स्कूल के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आधारशिला रखी और करीब 100 एकड़ भूमि में सैनिक स्कूल का निर्माण करवाने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान भी बजट में किया था। वहीं गुरदीप सुहाग ने कहा कि अगर स्कूल के निर्माण के लिए जमीन की कमी पड़ी तो पंचायत की तरफ से और भूमि भी दी जा सकती है।

मुख्यालय की तरफ से सैनिक स्कूल की भूमि से संबंधित जताई गई आपत्तियों को दूर कर दिया गया है। दोनों ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव पारित करवाए जा चुके हैं। गुरुवार को दोबारा से प्रस्ताव मुख्यालय को भेजे जा रहे हैं। - रामकरण शर्मा, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, मातनहेल।

मुख्यालय की तरफ से कुछ आपत्ति जताते हुए फाइल वापस भेज दी गई थी। पहले दी गई जमीन को वापस देने के साथ ही नई जमीन पर स्कूल के निर्माण के लिए आदेश जारी होने के बाद स्कूल का निर्माण कार्य शुरू होगा।- शिखा, एसडीएम, झज्जर।
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