सैनिक स्कूल निर्माण समिति के पदाधिकारी गुरदीप सुहाग ने बताया कि 30 जनवरी 1983 को मातनहेल के तत्कालीन सरपंच दलेल सिंह ने जिला सैनिक बोर्ड को प्रस्ताव भेजा था। उसके बाद 17 सितंबर 1987 को तत्कालीन सरपंच महा सिंह की तरफ से भी प्रस्ताव भेजा गया था। जबकि वर्ष 2002 में तत्कालीन सरपंच बादामो देवी की तरफ से तीसरी बार प्रस्ताव पारित कर करीब 259 एकड़ भूमि व रूड़ियावास के तत्कालीन सरपंच उमेद सिंह की तरफ से 42 एकड़ भूमि का प्रस्ताव पारित करवाकर जिला सैनिक बोर्ड को दिया था। जिसका इंतकाल भी सैनिक स्कूल के नाम 2002 में हो गया था।
2003 में रक्षामंत्री ने रखी थी आधारशिला
वर्ष 2003 में तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस व प्रदेश के मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने सैनिक स्कूल के निर्माण के लिए आधारशिला रखी थी। उसके बाद इस स्कूल को तब्दील कर रेवाड़ी जिले के पाली गोठड़ा में बना दिया गया था। एक बार फिर से भाजपा सरकार आने के बाद इस स्कूल के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आधारशिला रखी और करीब 100 एकड़ भूमि में सैनिक स्कूल का निर्माण करवाने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान भी बजट में किया था। वहीं गुरदीप सुहाग ने कहा कि अगर स्कूल के निर्माण के लिए जमीन की कमी पड़ी तो पंचायत की तरफ से और भूमि भी दी जा सकती है।
मुख्यालय की तरफ से सैनिक स्कूल की भूमि से संबंधित जताई गई आपत्तियों को दूर कर दिया गया है। दोनों ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव पारित करवाए जा चुके हैं। गुरुवार को दोबारा से प्रस्ताव मुख्यालय को भेजे जा रहे हैं। - रामकरण शर्मा, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, मातनहेल।
मुख्यालय की तरफ से कुछ आपत्ति जताते हुए फाइल वापस भेज दी गई थी। पहले दी गई जमीन को वापस देने के साथ ही नई जमीन पर स्कूल के निर्माण के लिए आदेश जारी होने के बाद स्कूल का निर्माण कार्य शुरू होगा।
- शिखा, एसडीएम, झज्जर।