किसान आंदोलन में शामिल युवती की 30 अप्रैल को मौत हो गई थी। इस मामले की टीकरी बॉर्डर पर पहले दिन से ही चर्चा चल रही थी। हर कोई संदेह व्यक्त कर रहा था कि युवती के साथ यौन अपराध हुआ है। युवती की मौत शहर के एक निजी अस्पताल में हुई थी। उस समय युवती की मौत का कारण संक्रमण बताया गया था। युवती के शव को एक खुले वाहन में रख किसानों ने शवयात्रा भी निकाली और पिता ने स्थानीय रामबाग में उसकी अंत्येष्टि की थी।
युवती का कोविड प्रोटोकोल से अंतिम संस्कार किया था। अगले दिन टीकरी बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की सभा के मंच पर अस्थि कलश रख किसानों ने मृतका को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उसके पिता भी मौजूद थे।
मृतका के परिजनों को मामले में शक था। इसलिए 5 मई को युवती की मां टीकरी बॉर्डर पहुंची। उन्होंने कई किसानों से मुलाकात कर अपनी बेटी की मौत के मामले की जांच करवाने की मांग की। इसके रोष स्वरूप कुछ आंदोलनकारियों ने टीकरी बॉर्डर पर ईंटों व अन्य सामान से बनी एक झोपड़ी को तहस-नहस कर दिया। मामले में कोई भी किसान नेता आधिकारिक रूप से कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ। लेकिन कुछ किसान नेताओं ने यह जरूर कहा कि जो भी हुआ बहुत बुरा हुआ।
युवती तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में भाग लेने के लिए गत 11 अप्रैल को टीकरी बॉर्डर आई थी। वह अपने कामरेड पिता के साथ जनवादी आंदोलनों में हमेशा सक्रिय रहती थी। कृषि कानूनों को किसान विरोधी मानती थी, इसलिए किसान आंदोलन से जुड़ी थी।
पश्चिम बंगाल की निवासी आंदोलनकारी युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म होने का मामला दर्ज किया गया है। दो महिलाओं व चार युवकों को इसमें नामजद किया गया है। वारदात स्थल बहादुरगढ़ शहरी क्षेत्र बताया गया है। मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -विजय कुमार, एसएचओ, शहर थाना, बहादुरगढ़।