बहादुरगढ़। सोनीपत जिले से सटे गांव निलोठी से लेकर रेवाड़ी जिले के कोसली के करीब तक और गुरुग्राम से सटे बाढ़सा से लेकर रोहतक जिले के डीघल तक फैले झज्जर जिले में पुलिस बल का अभाव है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब पुलिस में सरकार से मंजूरशुदा पद ही खाली पड़े हैं तो कानून व्यवस्था को दुरुस्त कैसे दुरुस्त रखा जा सकता है। हालांकि जिला पुलिस के अधिकारियों का मानना है कि जिला पुलिस में मैन पावर की कमी नहीं है।
जिले में कुल 15 थाने हैं। इनमें महिला पुलिस थाना बहादुरगढ़ व महिला पुलिस थाना झज्जर और यातायात पुलिस थाना बहादुरगढ़ भी शामिल है। बहादुरगढ़ शहर में स्थित छह थानों के अलावा गांव आसौदा व बादली में भी थाना है। झज्जर में महिला थाना, शहर थाना व सदर थाना के अलावा, बेरी, साल्हावास, माछरोली व दुजाना में भी पुलिस थाने हैं। चार अपराध जांच शाखा अलग से काम करती हैं। जिले में रेलवे की सीमा में कानून व्यवस्था को राजकीय थाना बहादुरगढ़ की पुलिस संभालती है।
जिले में पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस अधीक्षक, निरीक्षक उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक, हवलदार व सिपाही के पद मिलाकर पुलिस के कुल 2433 स्वीकृत पद हैं और फिलहाल केवल 1733 कर्मचारी व अधिकारी कार्यरत हैं। इस प्रकार फिलहाल 700 पद खाली पड़े हैं। जिनमें 464 पद तो केवल सिपाहियों के खाली हैं। बार एसोसिएशन के पूर्व जिला अध्यक्ष एडवोकेट सतीश छिकारा का कहना है कि इतने अधिक पदों का खाली रहना वाकई गंभीर बात है। इसके बावजूद अगर मौजूदा पुलिस कर्मचारी अपना दायित्व गंभीरता से निभाते रहें तो अच्छी बात है।
जहां तक हथियारों और दूसरे संसाधनों की बात है। बहादुरगढ़ में आसौदा थाने को छोड़ सभी थानों के भवन समुचित हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हथियार भी पर्याप्त और सही हैं। हथियारों को संबंधित थानों व पुलिस लाइन के के शस्त्रागारों में रखा जाता है। जरूरत के अनुसार पुलिस को हथियार जारी किए जाते हैं। साइबर सेल की व्यवस्था जिला मुख्यालय पर झज्जर में की गई है। सभी थानों के कुछ कुशल कर्मचारी आवश्यकता के अनुसार साइबर सेल से जुड़कर काम करते हैं। जिले के हरेक थाना प्रभारी के पास गाड़ी है। जिले में डायल 112 की 25 गाड़ियां सरकार ने उपलब्ध करवाई हैं। पुलिस लाइन झज्जर में पुलिस फोर्स को विभिन्न स्थानों पर ले जाने और जाने के लिए बसें है। संवाद
पुलिस कर्मचारियों को मिल रहा वर्दी भत्ता
जिला पुलिस के तमाम कर्मचारियों को वर्दी भत्ता दिया जाता है। जूते व कपड़े आदि वस्तुओं का भत्ता उनकी निर्धारित मियाद खत्म होने पर उपलब्ध करवा दिया जाता है। पीटी शूज, परेड के जूते और वर्दी के जूतों के लिए अलग-अलग भत्ते का प्रावधान है। कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच नियमित रूप से करवाई जाती है। थानों में और पुलिस लाइन में मेडिकल कैंप भी लगाए जाते हैं। पुलिस लाइन झज्जर में डिस्पेंसरी चलती है। जिला पुलिस प्रवक्ता चमनलाल ने बताया कि 35 से ज्यादा आयु वाले पुलिस कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर खास ध्यान रखा जाता है। जिसे के सभी पुलिस कर्मचारियों व अधिकारियों को कोरोना से बचाव के लिए टीके की दोनों डोज लग चुकी हैं। खेलने के लिए संसाधन नियमित रूप से उपलब्ध करवाए जाते हैं।
वर्जन
जिले में पुलिस बल की संख्या पर्याप्त है। राज्य सरकार ने जबसे डायल 112 की 25 गाड़ियां जिला पुलिस को उपलब्ध करवाई हैं तब से तो बहुत सुविधा हो गई है। इसके बावजूद शहर के उद्यमी सीएसआर के तहत पुलिस को आधुनिक सुविधाओं से युक्त कुछ गाड़ियां उपलब्ध करा दें तो पुलिस के पास संसाधन बढ़ेंगे और औद्योगिक क्षेत्रों समेत पूरे जिले में कानून व्यवस्था को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
- प्रशांत भूषण, बहादुरगढ़ में जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक