क्षेत्र में बिजली सप्लाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। लेकिन अगर निगम अधिकारियों से इस बारे में बातचीत की गई तो उनका कहना है कि शेड्यूल के अनुसार हर क्षेत्र में बिजली सप्लाई दी जा रही है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। लोगों को प्रर्याप्त मात्रा में बिजली न मिलने से रोष बना हुआ है। हालत यह है कि पूरे दिन में क्षेत्र में महज 6-8 घंटे की बिजली सप्लाई दी जा रही है। बिजली की मांग को लेकर लोग कई बार सड़कों पर उतर चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। अब तक तो गेहूं की फसल के लिए बिजली को खतरनाक माना जा रहा था। लेकिन अब फसल भी कटकर मंडियों में पहुंच चुकी है, फिर भी बिजली की समस्या से लोगों को दो चार होना पड़ रहा है।
प्रदीप, सोनू, नरेश, नरेंद्र शर्मा आदि ग्रामीणों का मानना है कि बिजली विभाग ग्रामीण क्षेत्र के हिस्से की बिजली उद्योगपतियों को बेच देता है। घरों में पशु चारा काटने, आटे की पिसाई न होने सहित अन्य कई समस्याएं बनी हुई हैं। यही कारण है कि लोग कई बार सड़क पर उतर चुके हैं। 24 घंटे में मात्र 6-8 घंटे बिजली मिलती है।
शहर वासी इनेलो नेता पवन धनखड़ का कहना है कि बिजली सप्लाई न आने से न केवल घरों में पेयजल आपूर्ति नही हो पा रही है, वहीं व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है। उन्होने कहा कि उन्होनें खेत में बिजली का ट्यूबवेल लगवा रखा है। लेकिन 24 घंटों में सिर्फ 3 से 4 घंटे ही बिजली सप्लाई दी जा रही है।
रिटायर्ड फौजी करतार सिंह का कहना है कि गांव की बात दूर, बल्कि बिजली निगम का शहर में 24 घंटे बिजली देने का शेड्यूल फेल हो चुका है। सप्लाई समय पर ना आने के कारण पीने के पानी के लिए भी कैंपर खरीदने पड़ते हैं।
क्षेत्र के गांव माजरा निवासी सतीश ठेकेदार का कहना है कि बिजली निगम की मनमानी का दंश आमजन को झेलना पड़ रहा है। गांव में पिछले कई माह से बिजली समस्या गहराए हुए है। हालत ऐसे बने हुए हैं की गांव में कई बार तो दो-दो दिन तक बिजली सप्लाई बाधित हो जाती है।
गांवों में 10 से 12 घंटे और शहर में 22 घंटे बिजली सप्लाई दी जा रही है। अभी तक बिजली शेड्यूल बढ़ाने के लिए निर्देश जारी नहीं हुए हैं। कई बार लाईन में फाल्ट आने के कारण बिजली सप्लाई बधित हो जाती है। इसके अलावा सभी गांवों और शहर में शेड्यूल के अनुसार ही सप्लाई दी जा रही है।
एसके चावला, एसई बिजली निगम झज्जर।