संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। उमस भरी गर्मी का असर अब लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है। लगातार बढ़ती उमस के कारण डिहाइड्रेशन पीड़ितों की संख्या में इजाफा हो रहा है। नागरिक अस्पताल समेत प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं।
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डाॅ. सुखपाल ने बताया कि उमस भरी गर्मी में अधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी में पसीना अधिक निकलने के कारण शरीर में पानी की मात्रा तेजी से घटती है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नींबू, संतरा और अन्य विटामिन-सी युक्त फलों का सेवन भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।
पानी की कमी के कारण पथरी के मरीजों की परेशानी भी बढ़ सकती है। उनके अनुसार डिहाइड्रेशन होने पर लंबे समय तक पेशाब न आना, पेशाब का गहरा पीला रंग, चक्कर आना, तेज सिरदर्द, त्वचा का सूखना, मुंह सूखना, कमजोरी और कब्ज जैसी शिकायतें हो सकती हैं। समय रहते इन लक्षणों पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि काम करने या एक्सरसाइज के दौरान पानी की बोतल अपने साथ रखें। बीच-बीच में पानी पीते रहें।
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क्या होता है डिहाइड्रेशन
-दरअसल, शरीर से पसीना अधिक निकलने पर शरीर को संतुलित करने से ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है। यदि इस दौरान व्यक्ति पानी का सेवन कम मात्रा में करता है तो उसे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। शरीर में पानी की कमी होने पर नमक और शुगर लेवल कम हो जाता है।
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चिकित्सकों की सलाह
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
मोबाइल में पानी पीने का रिमाइंडर सेट करें।
धूप में निकलने पर सिर और चेहरे को कपड़े या टोपी से ढकें।
नींबू पानी, नारियल पानी और मौसमी फलों का सेवन करें।
अधिक देर तक खाली पेट और तेज धूप में रहने से बचें।