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19 हजार हेक्टेयर भूमि में बारिश से बाजरा व कपास की फसल को नुकसान

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झज्जर। जिले में पिछले साल की अपेक्षा इस बार काफी अधिक बारिश हुई है। इससे कपास व बाजरे की फसलें करीब 60 फीसदी खराब हो गई हैं। इस बार पहले मानसून की देरी के कारण पूरी तरह से बाजरे की बिजाई नहीं हो पाई थी। जब मानसून की बारिश हुई तो वह किसानों के लिए आफत बन गई।
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कृषि विभाग को सरकार की तरफ से बाजरे की बिजाई का 50 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य दिया गया था। उसके बावजूद करीब 31 हजार हेक्टेयर भूमि में बाजरे की बिजाई हो पाई है। जिसमें से 14 हजार हेक्टेयर भूमि में फसलों को 60 फीसदी तक नुकसान हुआ है। अब बाजरे के कुल उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। अगर सरकार व प्रशासन की तरफ से बाजरे की खरीद के दौरान निगरानी नहीं रखी गई तो दूसरे राज्यों के बाजरे की बिक्री की संभावना बढ़ती जा रही है। जिले में किसानों की बाजरे की फसल पककर तैयार हो चुकी है। अब कटाई व कढ़ाई का कार्य तेजी से चल रहा है। वहीं जिले में इस बार 13 हजार हेक्टेयर भूमि में कपास की फसल की बिजाई हुई थी। जिसमें से करीब पांच हजार हेक्टेयर भूमि में 45 फीसदी तक नुकसान हुआ है। जिले में फिलहाल ई-गिरदावरी की पड़ताल का कार्य चल रहा है।
एक अक्तूबर से शुरू होगी बाजरे की खरीद
सरकार की तरफ से बाजरे की खरीद के लिए एक अक्तूबर की तिथि निर्धारित की है। जिले में बाजरे की खरीद के लिए इस बार अब तक सात अनाज मंडी आवंटित की गई हैं। पिछले साल झज्जर जिले में साढ़े 6 लाख क्विंटल से अधिक बाजरे की खरीद हुई थी। इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा अधिक बारिश होने से किसानों की बाजरे की फसल खराब भी हुई है और कुछ हिस्से में पानी भरने के कारण बिजाई नहीं हो पाई थी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के पास करीब 1600 शिकायतें जलभराव को लेकर आई हैं।
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वर्जन
बाजरे की फसल की कटाई व कढ़ाई का कार्य शुरू हो गया है। इस बार करीब 31 हजार हेक्टेयर भूमि में बाजरे की फसल बोई हुई है। जिसमें से 14 हजार हेक्टेयर व कपास की पांच हजार हेक्टेयर भूमि में फसलों को बारिश से नुकसान हुआ है।
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- डॉ. इंद्र सिंह, डीडीए, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, झज्जर।
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