संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। लगातार बढ़ती रसोई गैस की कीमतों और सिलिंडर की किल्लत ने दिहाड़ी मजदूरों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। मजदूर अब गैस की बजाय लकड़ी और अन्य वैकल्पिक साधनों से खाना बनाने को मजबूर हैं। मजदूरों का कहना है कि यदि जल्द ही हालात नहीं सुधरे तो उन्हें अपने घर लौटना पड़ेगा। प्रतिदिन 600 रुपये दिहाड़ी करने के बाद 350 रुपये किलो गैस खरीदना मुश्किल होगा।
600 की दिहाड़ी, 350 में गैस
छोटूराम नगर निवासी बबलू प्रसाद ने बताया कि उन्होंने सोमवार को ही एक किलो गैस 350 रुपये में भरवाई है जबकि उनकी दिनभर की दिहाड़ी मात्र 600 रुपये है। ऐसे में घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि दिनभर मेहनत करके जो कमाते हैं उसमें से अगर आधा गैस में ही चला जाए तो परिवार कैसे पाले।
महंगी गैस से परेशान परिवार, बार-बार भरवाना मुश्किल
लाइनपार के हरि नगर कॉलोनी निवासी रामनिवास भी गैस के बढ़ते दामों से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि 350 रुपये में गैस भरवाकर घर लेकर जाना पड़ता है, जो उनके लिए बेहद महंगा साबित हो रहा है। उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि इतनी महंगी गैस हम बार-बार नहीं भरवा सकते। ऐसे में वे जल्द ही अपने घर को लौट जाएंगे।
सिलिंडर नहीं मिला तो लकड़ी का सहारा
छोटूराम नगर निवासी धनंजय कुमार, जो रेलवे रोड पर लेबर चौक पर काम की तलाश में खड़े रहते हैं, ने बताया कि उन्हें कई बार गैस सिलिंडर मिलता ही नहीं। सोमवार को वे मांडोठी गांव काम के लिए गए थे, लेकिन गैस की अनुपलब्धता के कारण उन्हें लकड़ी लाकर खाना बनाना पड़ा। आज भी लकड़ी लेकर आया हूं, इसी से काम चलाएंगे।
प्रशासन से राहत की मांग
मजदूरों संतोष, गोविंद व सुरेश का कहना है कि गैस की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में कमी ने उनके दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई परिवार अब फिर से चूल्हे और लकड़ी पर लौटने लगे हैं। लोगों ने प्रशासन से गैस की कीमतों को नियंत्रित करने और सिलिंडर की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
-फोटो 84 : रामनिवास- फोटो : Samvad