गांव कानोंदा में करंट लगने से मोर की मौत हो गई। इस घटना पर ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने सरकारी डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि यदि समय पर इलाज मिल जाता तो मोर की जान बच सकती थी।
गांव के निवासी आकाश खत्री ने बताया कि कानोंदा में सरकारी स्कूल के पास एक मोर गंभीर अवस्था में जमीन पर पड़ा मिला। उसने तुरंत मोर को संभाला। आसपास कोई उपचार केंद्र नहीं था, इसलिए उसने राहत कार्य शुरू करने के बाद गांव की डिस्पेंसरी में फोन किया। आकाश के मुताबिक, उसने डॉक्टरों से मोर के इलाज करने की गुहार लगाई, मगर डॉक्टरों ने रुचि नहीं ली। करीब एक घंटा दर्द सहने के बाद मोर की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि यदि डॉक्टर मौके पर पहुंचते तो मोर की जान बच सकती थी। सरकार को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। पशु-पक्षियों के लिए इलाज आदि की व्यवस्था के लिए कारगर कदम उठाने चाहिएं।