रात को करीब 8:15 बजे रोहतक से वे दोनों वापस लौटे थे। गांव के बस स्टैंड पर दयाकिशन उतर गया और बिजेंद्र अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी को लेकर घर की तरफ छोछी रोड पर जा रहा था। इसी बीच गांव के ही परविंद्र पुत्र महेंद्र ने बिजेंद्र को सड़क पर बेसुध हालत में पड़ा देखा।
बताया गया है कि करीब 8:24 बजे बिजेंद्र अपने गांव में एक दुकान में थे। वहां से निकलने के बाद करीब 8:31 बजे उनकी हत्या कर दी गई। अपने घर से करीब 100 मीटर दूर बिजेंद्र घायल अवस्था में मिला। उसके कान के पास से खून निकल रहा था। परिजनों व अन्य ग्रामीणों ने बिजेंद्र को संभाला और रोहतक के कायनोस अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों चेक किया तो बिजेंद्र को कान के पास गोली मारी गई थी। उसकी सांसें थम चुकी थी। बिजेंद्र को गोली क्यों मारी गई यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। उसका मोबाइल फोन मौके पर ही मिला लेकिन उसकी स्कॉर्पियो गाड़ी नहीं मिली।
अनुमान लगाया जा रहा है कि कहीं बिजेंद्र की हत्या लूट की वारदात के दौरान तो नहीं की गई। गांव के लोगों ने बताया कि बिजेंद्र काफी मिलनसार था। हर किसी की मदद के लिए तैयार रहता था। पिछली बार उसने सरपंच का चुनाव लड़ा था। 60 वोट से हार का सामना करना पड़ा था। मटरू की हत्या होने से न केवल छारा बल्कि पड़ोसी गांवों के लोग स्तब्ध हैं। आसौदा थाना प्रभारी बाबूलाल का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।