बादली। क्षेत्र के खेतों से निकलने वाले बड़े और छोटे रजवाहों की सफाई न होने से किसानों को सिंचाई की चिंता सताने लगी है। ज्वार और अन्य हरे चारे की बुआई के लिए सिंचाई का समय चल रहा है और अभी तक किसी भी रजवाहे व माइनर की सफाई का काम शुरू नहीं हुआ है। प्रतिवर्ष जब सिंचाई विभाग माइनरों की सफाई कर पानी छोड़ता है, तब तक किसान अन्य साधनों से सिंचाई का काम पूरा कर लेते हैं। इससे किसान की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
किसान हरपीत, दीपक, मनजीत, कमल और जगदीश का कहना है कि सफाई न होने से पानी आगे नहीं बढ़ता है, जिससे उनके खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता। बार-बार सिंचाई विभाग से इस बारे में शिकायत की जाती है, परंतु कोई सुनवाई नहीं होती। ज्यादातर किसान रजवाहों की सिंचाई पर आश्रित हैं। नहरों से रजवाहे निकलते हैं, जिनसे किसान फसलों की सिंचाई करते हैं। दुल्हेड़ा नहर से निकलने वाली माजरी, गुभाना, बादली टेल पर पिछले पांच माह से पानी नहीं छोड़ा गया है। इन नहरों से करीब 2 हजार एकड़ जमीन की सिंचाई का काम होता है। विभाग द्वारा अभी तक किसी भी माइनर की सफाई का काम शुरू नहीं किया है। रजवाहों व माइनरों में बड़ी-बड़ी झाड़ी व घास खड़ी हुई है। किनारों पर खड़े पेड़ों की डाली रजवाहों में पड़ी हुई है। किसानों ने सफाई करवाने के बाद जल्द ही नहरों में पानी छोड़ने की मांग की है। हर साल सरकार आखिरी टेल तक पानी पहुंचाने का दावा करती है, परंतु समय पर सफाई का काम न होने से पानी नहीं पहुंच पाता। अभी तक किसी भी रजवाहे व माइनर की सफाई का काम शुरू नहीं हुआ है। टेंडर होने के बाद सफाई का काम शुरू होगा। ऐसे में रजवाहों की सफाई न हुई तो मानसून के दौरान और अधिक समस्या बन जाएगी।
इन गांवों के किसान हो रहे प्रभावित
रजवाहों की सफाई न होने से गुभाना, माजरी, लुकसर, गंगड़वा, बादली, जहांगीरपुर, खेड़ी जट्ट, लाडपुर, मुनीमपुर, दरियापुर और बुपनियां गांवों के किसान प्रभावित हो रहे हैं।
रजवाहों में टेल तक पानी पहुंचाने की पूरी व्यवस्था की जाएगी। सिंचाई विभाग इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं। किसानों को सिंचाई के लिए पानी की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी, फिलहाल जलघरों में पानी भरने के लिए नहरों में पानी छोड़ा गया है। वहीं रजवाहों की सफाई के लिए एस्टीमेट बनाकर भेजे हुए हैं। मंजूरी मिलते ही टेंडर छोड़कर 30 जून तक सफाई करा दी जाएगी।
राहुल गिल, एसडीओ, सिंचाई विभाग।