दिवाली की रात की गई आतिशबाजी का जहरीला धुआं पर्यावरण के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी भारी पड़ रहा है। वहीं दो दिन बाद भी धुएं के बादलों से मुक्ति नहीं मिल पाई। झज्जर सहित एनसीआर के एयर क्वालिटी इनडेक्स (एक्यूआई) में अगले सप्ताह भर तक सुधार आने की गुंजाइश भी कम ही आ रही है। आतिशबाजी के जहरीले धुएं के कारण सांस व दमा के मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो गई है। झज्जर नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुरारीलाल के अनुसार एक्यूआई बढ़ने का ज्यादा असर बच्चों व बुजुर्गों पर पड़ा है। इन दो दिनों से सांस से संबंधित परेशानियों के मरीजों की संख्या करीब दोगुनी हो गई है। डॉ. मुरारीलाल ने बताया कि जहरीले धुएं से ज्यादा प्रभावित छोटे बच्चे हो रहे हैं और अगले एक सप्ताह तक इसका असर रहेगा। प्रशासन द्वारा इस बार न तो लोगों को आतिशबाजी कम करने के प्रति जागरूक किया गया और न ही रोकने की दिशा में कोई कदम उठाए गए। झज्जर जिले में आतिशबाजी के कई स्टोर व निर्माण केंद्र हैं, जिनसे झज्जर व आसपास के दुकानदार चोरी-छिपे आतिशबाजी व पटाखे का सामान लेकर जाते हैं जो बिना किसी लाइसेंस के दिवाली पर धड़ल्ले से बेचा गया। आसानी से आतिशबाजी के लिए पटाखे, रॉकेट आदि उपलब्ध होने से युवाओं ने दिवाली को मध्यरात्रि के बाद तक आतिशबाजी की। दिवाली से पहले व अगले दिन भी देर रात तक आतिशबाजी का सिलसिला चलता रहा। जहरीला धुआं छोड़ने वाले रॉकेट, पटाखे, फुलझड़ियों व अनार आदि के कारण पिछले तीन दिन से आसमान में जहरीले धुएं के स्लेटी रंग के बादल छाए हुए हैं। धुएं के बादलों के साथ-साथ मौसम में बदलाव से हल्के बादल भी छाए हैं। इसके कारण सूर्य की किरणें भी पूरी तरह से धरती तक नहीं पहुंच पाई और दिन के समय पूरी तरह से आसमान में धुंधलापन छाया रहा।
झज्जर में बहादुरगढ़ के करीब रहा एक्यूआई
झज्जर शहर और इसके आसपास ऐसे उद्योग नहीं है जो जहरीला धुआं उगलते हो लेकिन बादली क्षेत्र में बड़ी संख्या में ईट भट्ठे हैं, जिनके जहरीले धुएं से वातावरण में प्रदूषण घुल रहा है। आतिशबाजी ने तो प्रदूषण के तमाम रिकॉर्ड तोड़ दिए। यहीं कारण है कि झज्जर का एयर क्वालिटी इनडेक्स मंगलवार को 316 दर्ज किया गया, जबकि बहादुरगढ़ का एक्यूआई 332 दर्ज किया गया।