जिले में मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम के तहत स्कूलों में बच्चों को जलजनित व मच्छर के काटने से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक किया जाए ताकि बच्चे अपने आसपास जलभराव से होने वाली परेशानियों के प्रति समाज को जागरूक कर सके। झज्जर की एसडीएम शिखा ने यह निर्देश शुक्रवार को लघु सचिवालय स्थित कांफ्रेंस हॉल में मलेरिया नियंत्रण के लिए गठित जिला स्तरीय समिति की बैठक को संबोधित करते हुए कही। इस बैठक के उपरांत राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के दूसरे चरण को लेकर भी चर्चा की गई। एसडीएम ने कहा कि जिले में मलेरिया नियंत्रण से संबंधित कार्यों को लेकर सभी विभाग गंभीरता से कार्य करें। उन्होंने कहा कि मलेरिया नियंत्रण से संबंधित कार्यों की सभी विभाग नियमित रूप से उपायुक्त कार्यालय को भी अपनी रिपोर्ट भेजेंगे। मलेरिया नियंत्रण के लिए सिविक बायलॉज निर्धारित है जो भी इनका उल्लंघन करते पाया जाए उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जल जनित व मच्छर के काटने से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए आबादी वाले हिस्सों में नियमित रूप से फॉगिंग कराई जाए। बैठक में एसडीएम ने कहा कि नगर पालिका व परिषद क्षेत्रों में खाली प्लॉटों में होने वाले जलभराव की भी निगरानी की जाए। कहीं भी जलभराव मिले तो उन प्लॉटों के मालिकों को नोटिस दिया जाए। उन्होंने स्थानीय निकाय विभाग को एंटी लारवा अभियान के तहत चालान करने पर फोकस रखने के निर्देश दिए। साथ ही जिन गांवों में पिछली बार मलेरिया के मामले अधिक आए थे उन पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क किनारे गड्ढों को भरने के लिए भी बैठक के दौरान लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए। साथ ही निर्माण स्थलों व ईंट-भट्ठों पर भी बरसाती पानी के जमाव को रोकने के लिए कदम उठाने की बात कही।
कृमि मुक्ति कार्यक्रम का दूसरा चरण 8 अगस्त से
सिविल सर्जन डॉ. रणदीप सिंह पूनिया ने बैठक के दौरान आगामी 8 अगस्त से आरंभ होने वाले राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के दूसरे चरण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष में दो बार फरवरी व अगस्त माह में कृमि मुक्ति कार्यक्रम चलाया जाता है। उन्होंने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा यह एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। पेट में कीड़े होने की वजह से बच्चा अनीमिक हो सकता है, जिसका असर उसके विकास व पढ़ाई-लिखाई पर भी पड़ता है। इसी की रोकथाम के लिए सरकार ने यह कार्यक्रम चलाया है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत एक से 19 वर्ष आयु के बच्चों को छह माह में एक गोली लेनी पड़ती है। जिले में फरवरी माह के दौरान सराहनीय कार्य हुए थे और जिले की गिनती प्रदेश के छह श्रेष्ठ जिलों में हुई थी। एसडीएम ने बैठक के दौरान कार्यक्रम से संबंधित तैयारियों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए।