ड्रेन टूटने से जलमग्न हुए खेत।
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बहादुरगढ़। क्षेत्र के गांव छुड़ानी में केसीबी ड्रेन टूटने से बहुत बड़े रकबे में खड़ी धान और ज्वार की फसल डूब गई है। हाल ही में बनी मातन लिंक ड्रेन जहां केसीबी में मिलती है वहीं से केसीबी ड्रेन टूट गई। इससे मातन लिंक ड्रेन और केसीबी ड्रेन का पानी गांव के खेतों में भर गया। कड़ी मशक्कत के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने ड्रेन के टूटे हुए मुहाने को ठीक तो करा दिया लेकिन खेतों में चार फुट से ज्यादा पानी खड़ा होने से धान की फसल पूरी तरह से खराब हो गई है।
धान की पौध के ऊपर भी पानी ही पानी नजर आ रहा है। दरअसल छुड़ानी गांव की सीमा पर करीब 40 साल से खुली पड़ी मातन माइनर को इस बार खुदाई कर केसीबी में जोड़ दिया गया। लेकिन मातन लिंक माइनर का बेड लेवल केसीबी के बैड लेवल से काफी नीचे कर दिया गया। जिस कारण मातन लिंक ड्रेन का पानी केसीबी में डालने के लिए मोटरें लगानी पड़ गई। लेकिन पहली बारिश में ही मातन लिंक नहर में अत्यधिक मात्रा में पानी आ गया और मातन लिंक ड्रेन भी ओवरफ्लो हो गई। केसीबी ड्रेन में भी पानी अधिक आने और किनारे कमजोर होने के केसीबी ड्रेन टूट गई। पानी की मार से फसल बर्बादी का दंश झेल रहे किसान एक बार फिर से अपनी फसल की बर्बादी पर आंसू बहाने को मजबूर हो गए हैं। लापरवाही विभाग की और नुकसान भुगतने पर किसान मजबूर हैं। किसान अजीत, जगदीश, बेल सिंह, मोहन, विजय ,लाला और अनिल ने बताया कि केसीबी ड्रेन की कई वर्षों से छंटाई नहीं की गई और न ही उसके किनारे मजबूत किए गए। हाल ही में बनी मातन लिंक ड्रेन के किनारे भी नहीं बांधे गए और केसीबी से मातन लिंक ड्रेन का लेवल नीचा कर दिया। किसानों ने सरकार से खराब हुई फसलों का मुआवजा देने की मांग की है। क्योंकि धान लगाने पर किसानों ने लाखों खर्च कर दिया और उसके बाद भी फसल सिंचाई विभाग की लापरवाही से बर्बाद हो गई है।
कई वर्षों से नहीं हुई केसीबी की छंटाई और सफाई
केसीबी ड्रेन रोहतक जिला के कुलताना से निकलकर छारा और बुपनियां होते हुए दिल्ली की तरफ जाती है। बरसाती पानी की निकासी के लिए बनी ड्रेन का कुछ हिस्सा रोहतक सिंचाई विभाग के मातहत आता है तो कुछ हिस्सा झज्जर सिंचाई विभाग के मातहत आता है। रोहतक सिंचाई विभाग अपने हिस्से की सफाई और छंटाई लगभग हर साल करवा देता है। लेकिन छुड़ानी गांव से शुरू होने वाले केसीबी के झज्जर सिंचाई विभाग वाले हिस्से की सफाई कई वर्षों से धरातल में नहीं हुई है। जिसके कारण केसीबी में पानी का बहाव रुक जाता है और यही वजह रही कि वीरवार को केसीबी के टूटने से सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई। केसीबी के किनारे भी कई सालों से मजबूत नहीं किए गए हैं जगह जगह पर किसानों ने अपनी सुविधानुसार केसीबी के किनारे भी काट रखे थे जिसके कारण केसीबी के किनारों से भी इस बार पानी खेतों में घुसा है।