बहादुरगढ़। स्थानीय नागरिक अस्पताल को 100 से बढ़ाकर 200 बिस्तरों के अस्पताल में अपग्रेड तो कर दिया गया लेकिन यहां मरीजों की संख्या के हिसाब से विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा है। यहां चिकित्सकों के 55 पद स्वीकृत हैं लेकिन तैनाती सिर्फ 25 की है। ऐसे में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही।
नागरिक अस्पताल में इन दिनों हर रोजाना नए और पुराने मरीज आते हैं। मगर उन्हें अस्पताल में अक्सर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सेवा नहीं मिलती। अस्पताल में वर्तमान में 55 डॉक्टरों के स्वीकृत पद हैं लेकिन वर्तमान में यहां 25 की ही सेवाएं मिल पा रही हैं। इनमें कई डॉक्टर स्पेशलिस्ट भी हैं तो बाकी मेडिकल ऑफिसर हैं। सालभर से मेडिसन विभाग में फिजिशयन ही नहीं है। त्वचा रोग विशेषज्ञ की सेवाएं भी नहीं मिल पा रहीं है। पहले त्वचा रोग और मेडिसन विभाग में 2-2 स्पेशलिस्ट थे ।
निजी अस्पतालों की मिली रही अच्छी सैलरी
अस्पताल में कई डॉक्टर ऐसे भी हैं जो या तो लंबी छुट्टी पर चल रहे हैं या त्यागपत्र देकर चले गए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने विभागीय उच्च अधिकारियों से अलग-अलग श्रेणी के करीब 30 डॉक्टरों की मांग भेजी है।
इन डॉक्टरों की डिमांड
फिजिशयन - 4
सर्जन 2
बाल रोग 3
स्त्री रोग 1
मनोरोग 1
फारेंसिक 2
माइक्रोआरटीपीसीआर 1
पैथोलाजिस्ट 1
ईएनटी 1
त्वचा रोग 1
अन्य 8
वर्जन
कई स्पेशलिस्ट व मेडिकल ऑफिसर की कमी अस्पताल में खल रही है। इन कमियों को पूरा करने के लिए विभाग को मांग भेजी हुई है। फिलहाल उपलब्ध संसाधनों में बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-डॉ. देवेंद्र मेघा, प्रशासनिक अधिकारी।
नागरिक अस्पताल, बहादुरगढ़।
नागरिक अस्पतालों में वे जरूरतमंद लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं जिनके लिए निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना संभव नहीं है लेकिन जब नागरिक अस्पताल में संबंधित बीमारी का डॉक्टर तक नहीं मिलता तो यह कल्पना की जा सकती है कि गरीब लोगों का क्या होता होगा।
-जयकरण दलाल, सामाजिक कार्यकर्ता। (फोटो 2)
ये बोले लोग
एक बार मेरे पांव में फोड़ा हो गया। नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़ में कई दिन तक गया। यहां सर्जन की कमी में आराम नहीं मिला तो पीजीआई रोहतक जाकर इलाज करवाना पड़ा। कई लाख आबादी वाले शहर के अस्पताल में सर्जन की व्यवस्था तो सरकार को करनी ही चाहिए।
-सुधांशु, कॉलेज विद्यार्थी। (फोटो 3)
हमारे गांव के सरकारी औषधालय में इलाज की पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। इसलिए हमें छोटी सी तकलीफ के लिए भी नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़ जाना पड़ता है। लेकिन यहां कई बार डॉक्टर ही नहीं मिलते। सरकार ने यहां करोड़ों रुपये खर्च करके बड़ा भवन तो बना दिया, अब डॉक्टर भी तो हों।
--कृष्ण कुमार, गांव छुड़ानी (फोटो 4)
कान में दर्द का इलाज करवाने के लिए मैं शाम के वक्त नागरिक अस्पताल गया। दर्द सहन नहीं हो रहा था, इसलिए शाम को ही जाना पड़ा लेकिन यहां स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं था इसलिए एक अन्य स्वास्थ्यकर्मी ने दवा लिख दी। इससे भी आराम नहीं हुआ तो रात को ही निजी अस्पताल से महंगा इलाज लेना पड़ा।
-राम प्रवेश, दुकानदार। (फोटो 5)
-फोटो 6 : सुझाव : कैप्शन बिना ही फोटो लगे तो ।