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अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा झज्जर का पुरातत्व संग्रहालय: हुड्डा

Mon, 11 Aug 2014 12:22 AM IST
jhjhar
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अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा झज्जर का पुरातत्व संग्रहालय: हुड्डा मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रविवार को स्वामी ओमानंद सरस्वती पुरातत्व संग्रहालय की आधारशिला रखी। इस संग्रहालय पर करीब 10 से 15 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय बनेगा। अपनी तरह के इस अद्भूत संग्रहालय से आने वाली पीढ़ियां प्रेरणा लेंगी। उन्होंने कहा कि स्वामी ओमानंद सरस्वती ने देश भर में घूमकर प्राचीन धरोहर के तौर पर भारतीय संस्कृति का जो अनमोल खजाना एकत्रित किया है, उसे इस संग्रहालय में संजोया जाएगा।

 उन्होंने कहा जो समाज अपने स्वतंत्रता सेनानियों अथवा समाज निर्माताओं को भूल जाता है, उसकी संस्कृति खत्म हो जाती है। संग्रहालय जैसे निर्माण संस्कृति के संवाहक हैं। उन्होंने कहा कि करीब 10 से 15 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस संग्रहालय पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोधार्थी शोध भी कर सकेंगे। उन्होंने राखी गढ़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि हड़प्पा और मोहन जोदड़ों से भी पुरानी संस्कृति हरियाणा की माटी में मिली हैं।
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 संग्रहालय से आने वाली पीढ़ी को भी मालूम होगा कि अतीत में हमारी संस्कृति और जीवन कितना सुखी था। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय में केवल पांच लड़कियों के साथ इस शिक्षण संस्थान का पौधा भगत फूल सिंह ने लगाया था। आज यह वट वृक्ष के रूप में उत्तरी भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय बन चुका है। जहां इस समय सात हजार से अधिक छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।

दिल्ली विधानसभा के पूर्व स्पीकर डॉ. योगानंद शास्त्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने ऐतिहासिक यात्राएं की हैं और जिन्होंने इसका महत्व समझा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन ने कहा कि इस धरोहर में गुरुकुल झज्जर में संकलित प्राचीन मूर्तियां, सिक्के, पांडु लिपियों सहित अन्य प्राचीन धरोहर को सहजा जाएगा।

 इस मौके पर हरियाणा की शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल, सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर,  पुरातत्व, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के महानिदेशक सुधीर राजपाल, विधायक डॉ. रघुबीर कादियान, नरेश शर्मा, प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह, गुरुकुल झज्जर के आचार्य विजयपाल व विरजानंद देवकर्णी मौजूद रहे।
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