मधुबनी के निवासी रामआसरे एक स्थानीय फुटवियर फैक्टरी में काम करते थे। लॉकडाउन लगते ही फैक्टरी की तीन मशीनों पर काम करने वाले कारीगर अपने घर चले गए। इससे फैक्टरी की बाकी 9 मशीनों का काम भी रुक गया और मालिक को फैक्टरी ही बंद करनी पड़ी। परिणामस्वरूप दूसरी मशीनों के श्रमिक भी निकल गए। मैनेजर ने सभी मजदूरों का हिसाब भी कर दिया।
देवरिया के विनोद ने बताया कि उन्हें बहादुरगढ़ की जूता निर्माण फैक्टरी में काम मिला हुआ था। साथ में पत्नी भी काम करती थी। मगर अब काम नहीं रहा तो यहां किराये और रसोई चलाने के पैसे नहीं बचेंगे। लॉकडाउन का कोई अंदाजा नहीं है, यह कितने दिन तक चले। इसी वजह से घर लौट रहे हैं।
बहादुरगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेंद्र छिकारा का कहना है कि बहादुरगढ़ की लगभग सभी फैक्टरियां बंद पड़ी हैं। कोई फैक्टरी प्रशासन से पास ले भी रहे है तो वो केवल पहले से तैयार माल को पैक कर भेजने के लिए अथवा अपने संयंत्र की सुरक्षा के लिए ले रही है।