बहादुरगढ़। सरकार के अंतिम बजट की पक्ष ने सराहना की है तो विपक्ष ने इसे चुनावी स्टंट करार दिया है। वहीं उद्योगपतियों, किसानों व आमजन की भी मिली जुली प्रतिक्रिया है।
आयकर सीमा 2. 5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख करना स्वागत योग्य कदम है। सरकार के बजट से इस आय वर्ग के कर्मचारियों को राहत मिली है। इससे पहले किसी सरकार ने आमजन के लिए इतना नहीं सोचा।
(विपिन, व्यवसायी)
बजट को पूरी तरह से लोकसभा चुनाव को देखते हुए बनाया गया है। बजट में ऐसा कुछ नहीं है जिसकी सराहना की जाए। बजट को चुनावी कहा जाए तो अतिशोक्ति नहीं होगी।
(कर्मवीर राठी, इनेलो जिलाध्यक्ष)
भाजपा की सरकार जन सेवा को समर्पित सरकार है। समाज के हर वर्ग का ध्यान रखती है। वित्त मंत्री ने हरेक वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए बजट पेश कि या। नौकरी पेशे वालों, किसानों, उद्योगपतियों सहित हरेक वर्ग के लिए यह बजट खुशियों भरा है।
विधायक नरेश कौशिक
आयकर दरों में विशेष छूट की आशा रखने वालों लोगों को निराशा हुई है। सरकार का यह बजट ईमानदार कर दाताओं और नौकरी पेशा कर्मचारियों के हित में नहीं है।
-हर्ष, करदाता
सरकार के इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब में पांच लाख तक की आर्य पर टैक्स छूट कर दी है। एफडी पर ब्याज पर चालीस हजार तक टैक्स न लगाने की घोषणा की गई है लेकिन आयकर सीमा न बढ़ाना बजट में खामी रही है।
मनीषा, टैक्स अधिवक्ता
बजट में किसानों के लिए पीएम सम्मान योजना एवं छोटे किसान के लिए 500 रुपये मासिक सहायता का प्रावधान किया गया है। मासिक सहायता प्रावधान से कोई बड़ा लाभ नहीं होगा। किसानों के लिए पेंशन की व्यवस्था की चाहिए।
-अनिल प्रधान, किसान
किसान व मजदूरों को गुमराह करने का काम बजट में किया गया है। बजट सिर्फ दिखावा है। वित्त मंत्री ने बजट में घर खरीदारों के लिए जीएसटी दरों में कमी के लिए जीएसटी परिषद से सिफारिशें की हैं। दर में कमी नहीं की है।
-जितेंद्र, किसान मांडोठी
सामाजिक क्षेत्र के लिए यह एक सकारात्मक बजट है। हालांकि कारपोरेट जगत को इस बजट ने थोड़ा निराश किया है पर विकास का सवाल सभी के विकास से जुड़ा है। सामाजिक क्षेत्र का विकास भी दूरगामी लाभ के लिए जरूरी है।
सुरेंद्र पाराशर, उद्योगपति